
यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब उनके खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध के मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए गए हैं। ढाका की एक अदालत ने यह फैसला लिया है, जिसमें जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान हुई हिंसा में करीब 1,400 नागरिकों की मौत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने शेख हसीना के अलावा पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान और पूर्व पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल मामून के खिलाफ भी मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। इन तीनों पर छात्र आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने और अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। अब्दुल्ला अल मामून इस समय हिरासत में हैं और उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया है, जबकि शेख हसीना और असदुज्जमां खान वर्तमान में न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हैं।
बताया जा रहा है कि बांग्लादेश में सरकार गिरने के बाद शेख हसीना भारत चली गई थीं। मई 2025 में अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग, पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। यह निर्णय तब तक प्रभावी रहेगा जब तक पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश की राजनीति में गहरा प्रभाव डाला है और आने वाले समय में इसका असर देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर भी देखने को मिल सकता है।
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