
यूनिक समय, नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने वाले देशों, विशेषकर भारत और चीन पर अमेरिका का दबाव अब चरम पर पहुंचने वाला है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक सनसनीखेज दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे द्विदलीय (बाइपार्टिजन) विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिसके लागू होते ही रूसी तेल और यूरेनियम खरीदने वाले देशों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका उन देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) को बढ़ाकर 500 प्रतिशत तक कर सकता है, जो सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार समीकरणों को हिला कर रख देगा।
सीनेटर ग्राहम के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई हालिया उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस विधेयक को अंतिम रूप दिया गया है और इसे अगले सप्ताह मतदान के लिए सीनेट में पेश किया जा सकता है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के समर्थन वाले इस बिल का मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘तेल निर्यात’ पर प्रहार करना है। अमेरिका का मानना है कि भारत और चीन द्वारा की जा रही तेल खरीद से मिलने वाला पैसा पुतिन की ‘युद्ध मशीन’ को ईंधन दे रहा है। लिंडसे ग्राहम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इतना दबाव बनाने की शक्ति देगा कि उनके पास रूसी तेल छोड़ना ही एकमात्र विकल्प बचेगा।
व्यापारिक युद्ध और भारत पर प्रभाव
भारत वर्तमान में रूस से तेल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में भारी तनाव आ सकता है। गौरतलब है कि पिछले साल भी ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीद को आधार बनाकर भारतीय उत्पादों पर 25% की पेनल्टी लगाई थी, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था। अब 500% तक टैरिफ बढ़ने की संभावना भारतीय निर्यातकों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस कूटनीतिक और आर्थिक हथियार के जरिए भारत को मास्को से दूर कर वाशिंगटन के करीब लाना चाहता है, लेकिन भारत हमेशा से अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहा है।
वैश्विक समीकरणों में बढ़ती कड़वाहट
यह विधेयक केवल भारत ही नहीं, बल्कि चीन के साथ भी अमेरिका के व्यापारिक युद्ध को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। अमेरिका पहले ही चीनी सामानों पर 145% तक टैरिफ लगा चुका है, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क थोपा है। अब नए प्रतिबंधों की इस आहट ने वैश्विक बाजारों में हलचल तेज कर दी है। सीनेटर ग्राहम का तर्क है कि यूक्रेन शांति के लिए समझौते कर रहा है, जबकि पुतिन केवल समय बर्बाद कर रहे हैं, इसलिए आर्थिक प्रहार ही उन्हें रोकने का एकमात्र रास्ता है। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले सप्ताह होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं, जो भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति की दिशा तय करेगी।
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