UP: मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में उमड़ेगा 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं का सैलाब, प्रशासन ने जारी किया रूट डायवर्जन प्लान

Mauni Amavasya in Prayagraj

यूनिक समय, नई दिल्ली। संगम नगरी प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर होने वाले मुख्य स्नान पर्व के लिए मेला प्रशासन और पुलिस विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस बार मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है, जिसे देखते हुए करीब साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालुओं के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने का अनुमान है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि 17 जनवरी की रात 11:53 बजे से शुरू होकर 18 जनवरी की रात 1:09 बजे तक रहेगी, जिस दौरान किया गया जप, तप और स्नान अक्षय पुण्य प्रदान करेगा। इसी भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस ने शनिवार रात 12 बजे से सोमवार दोपहर 12 बजे तक के लिए एक बेहद व्यापक रूट डायवर्जन प्लान लागू कर दिया है, जिसके तहत शहर की सीमाओं पर भारी वाहनों की नो-एंट्री सुनिश्चित की गई है और केवल मेला ड्यूटी से जुड़े वाहनों को ही शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था इतनी विस्तृत है कि दिल्ली और कानपुर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को फतेहपुर के कल्यानपुर से ही बक्सर मोड़ की तरफ मोड़ दिया जाएगा, जहाँ से वे रायबरेली, प्रतापगढ़, जौनपुर और फूलपुर होते हुए वाराणसी की ओर जा सकेंगे।

इसी तरह बांदा और रीवा जाने वाले वाहनों को चौडगरा से चिल्ला होकर भेजा जाएगा, जबकि लखनऊ, अयोध्या और सुल्तानपुर से आने वाले ट्रैफिक के लिए भी प्रतापगढ़ और रायबरेली के विभिन्न लिंक मार्गों को चिन्हित किया गया है। शहर के भीतर भीड़ का दबाव न बढ़े, इसके लिए मंदर मोड़, बमरौली चौकी, सहसों चौराहा और सोरांव बाईपास जैसे प्रमुख प्रवेश द्वारों पर नो-एंट्री की सख्त पहरेदारी रहेगी। कौशाम्बी और कोखराज की ओर से आने वाले वाहनों को नवाबगंज और हंडिया बाईपास के रास्ते वाराणसी भेजा जाएगा, ताकि मेला क्षेत्र के मुख्य मार्गों पर केवल पैदल यात्रियों और आवश्यक सेवाओं का ही आवागमन रहे।

प्रशासनिक स्तर पर भीड़ प्रबंधन के लिए इस बार अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम और रेडियो संचार प्रणाली मुख्य भूमिका निभा रही है। मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार, पूरे मेला क्षेत्र को नौ अलग-अलग सर्किल में विभाजित किया गया है और करीब 250 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था की गई है ताकि दूर-दराज से आने वाले वाहनों को व्यवस्थित खड़ा किया जा सके।

संगम क्षेत्र पर दबाव कम करने के उद्देश्य से नागवासुकि क्षेत्र में अलग से स्नान की व्यवस्था की गई है और ‘काली पार्ट-दो’ नाम से एक नए स्नान घाट का विस्तार भी किया गया है। शुक्रवार से ही मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी आमद शुरू हो चुकी है और करीब 30 लाख लोगों ने पहले ही उपस्थिति दर्ज करा दी है, जिनमें बड़ी संख्या कल्पवासियों की है। प्रशासन ने जल यातायात, आपदा प्रबंधन और अग्निशमन की टीमों को भी हाई अलर्ट पर रखा है ताकि करोड़ों की भीड़ के बीच सुरक्षा और सुविधा का संतुलन बना रहे।

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