
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी इजरायल यात्रा को लेकर देश के भीतर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रधानमंत्री को एक औपचारिक पत्र लिखकर उनसे इस यात्रा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। मौलाना ने तर्क दिया है कि गाजा में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICC) द्वारा बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी रुख के बीच यह दौरा भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकता है।
मौलाना के पत्र के मुख्य बिंदु
मौलाना रजवी ने अपने पत्र में तीखा हमला करते हुए कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर गाजा में मुसलमानों के नरसंहार का आरोप है। उन्होंने याद दिलाया कि इंटरनेशनल कोर्ट ने नेतन्याहू के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जैसी स्थितियां बनी हुई हैं, ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री का उनसे मिलना उचित नहीं होगा।
पत्र में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा गया कि पिछले नौ वर्षों में उन्होंने अरब और अन्य मुस्लिम देशों के साथ बहुत मजबूत और सम्मानजनक रिश्ते बनाए हैं। मौलाना का मानना है कि इस यात्रा से फलस्तीन के नागरिकों और उन मुस्लिम देशों को ठेस पहुँच सकती है जिन्होंने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा है।
मौलाना ने वैश्विक भू-राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच जंग जैसे हालात हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के शिया और सुन्नी मुसलमान ईरान के प्रति सहानुभूति रखते हैं और ईरान के साथ भारत के संबंध हमेशा से ऐतिहासिक रहे हैं।
मौलाना ने अंत में लिखा कि भारत के मुसलमान पीएम मोदी को पसंद करते हैं और उनकी छवि पूरी दुनिया में साफ-सुथरी है। भ्रष्टाचार के आरोपों और अंतरराष्ट्रीय विवादों में घिरे नेतन्याहू से मुलाकात करने पर इस बेदाग छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
पीएम मोदी के दौरे का प्रस्तावित कार्यक्रम
विभिन्न विरोधों के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ऐतिहासिक दौरे की तैयारियाँ जोरों पर हैं और नौ साल बाद होने वाली इस यात्रा के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी इजरायली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित कर सकते हैं और इसके साथ ही वह होलोकॉस्ट (नरसंहार) पीड़ितों की याद में बने स्मारक ‘याद वाशेम’ का दौरा कर वहाँ अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस यात्रा के दौरान रक्षा और अत्याधुनिक तकनीक पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिसके अंतर्गत प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता संपन्न होगी।
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि इस संकट की घड़ी में फलस्तीनियों को बेसहारा छोड़ दिया गया है। भारत की पारंपरिक विदेश नीति हमेशा से स्वतंत्र फलस्तीन के समर्थन में रही है, जिसे लेकर अब नई बहस छिड़ गई है।
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