
यूनिक समय, नई दिल्ली। फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के शीर्षक और उसकी विषयवस्तु को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस फिल्म पर कड़ा ऐतराज जताते हुए केंद्र सरकार से इसे तुरंत प्रतिबंधित करने की मांग की है। मायावती ने इसे पूरे ब्राह्मण समाज के सम्मान पर चोट करार दिया है।
मायावती का कड़ा रुख
शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि पिछले कुछ समय से न केवल उत्तर प्रदेश में, बल्कि अब सिनेमा के माध्यम से भी ‘पंडित’ समाज को ‘घूसखोर’ बताकर उनका सार्वजनिक अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिल्म का यह जातिसूचक नाम समूचे ब्राह्मण समाज में भारी रोष पैदा कर रहा है। मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि बसपा इस कृत्य की कड़ी निंदा करती है और सरकार को ऐसी विवादित सामग्री पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज
विवाद बढ़ता देख लखनऊ की हजरतगंज पुलिस ने फिल्म के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस ने यह कार्रवाई जातिगत भावनाएं आहत करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के आरोपों के तहत की है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, फिल्म का शीर्षक स्पष्ट रूप से एक विशेष जाति को लक्षित कर उन्हें अपमानित करने के इरादे से रखा गया प्रतीत होता है।
शांति व्यवस्था भंग करने की साजिश?
पुलिस का कहना है कि फिल्म के मेकर्स द्वारा समाज में वैमनस्यता फैलाने और शांति व्यवस्था को खतरे में डालने के उद्देश्य से इस तरह की सामग्री तैयार की गई है। इस मामले में फिल्ममेकर्स काउंसिल (FMC) ने भी निर्माताओं को नोटिस भेजा है, वहीं नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। दूसरी ओर, विवाद गहराता देख फिल्म से जुड़े कलाकारों और मेकर्स ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
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