
यूनिक समय, नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले में तालाब और सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद के ध्वस्तीकरण से जुड़े मामले में एक बड़ा निर्णय लिया है। मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल याचिका पर कोर्ट ने कोई अंतिम राहत नहीं दी है, जिससे उन्हें बड़ा झटका लगा है।
हाई कोर्ट का निर्देश और कानूनी राहत
जस्टिस दिनेश पाठक की सिंगल बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मस्जिद पक्ष (याची) को ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ वैकल्पिक उपचार अपील दाखिल करने की छूट दी है। हाई कोर्ट में लगातार दूसरे दिन, छुट्टी के दिन भी अर्जेंट बेंच बैठी और इस संवेदनशील मामले की सुनवाई की।
मस्जिद पक्ष की दलीलें और आरोप
यह याचिका मसाजिद शरीफ गोसुलबारा रावां बुजुर्ग और मस्जिद के मुतवल्ली मिंजर की ओर से दाखिल की गई थी। याची के अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि उन्हें हस्तक्षेप के बाद ध्वस्तीकरण का आदेश मिला है, जबकि कार्रवाई बगैर आदेश दिए ही शुरू की जा रही थी।
मस्जिद पक्ष ने दलील दी कि बारात घर को ध्वस्त कर दिया गया है। ध्वस्तीकरण के लिए 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) और दशहरे का दिन चुना गया, जिससे बुलडोजर कार्रवाई के दौरान भीड़ के कारण कोई बड़ा हादसा या बवाल हो सकता था।
आरोप है कि बारात घर तालाब की जमीन पर बना था, जबकि मस्जिद का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर बना हुआ है। हालांकि, मस्जिद कमेटी ने सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद के अवैध हिस्से को खुद हथौड़े से तोड़ने की बात कही है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका का निस्तारण किया। राज्य सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल समेत चीफ स्टैंडिंग काउंसिल जेएन मौर्या और स्टैंडिंग काउंसिल आशीष मोहन श्रीवास्तव ने रखा। मस्जिद की ओर से अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्री त्रिपाठी ने पक्ष रखा। याचिका में राज्य सरकार, डीएम व एसपी संभल, एडीएम, तहसीलदार और ग्राम सभा को पक्षकार बनाया गया था।
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