UP News: यूपी गौ आयोग और पतंजलि ने मिलाया हाथ; गौशालाएं बनेंगी ग्रामीण उद्योग का केंद्र

यूपी गौ आयोग और पतंजलि ने मिलाया हाथ

यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में गौ संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यूपी गौ सेवा आयोग ने पतंजलि योगपीठ के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस पहल के तहत, प्रदेश की गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र के बजाय ग्रामीण उद्योग के केंद्रों में बदला जाएगा, जहाँ पंचगव्य उत्पादों और बायोगैस का बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा। यह फैसला हाल ही में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के बीच हरिद्वार में हुई एक बैठक के बाद लिया गया।

एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यूपी गौ आयोग ने हाल ही में हरिद्वार में आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, योगगुरु बाबा रामदेव और पतंजलि के सह-संस्थापक आचार्य बालकृष्ण के बीच हुई बातचीत के बाद पतंजलि योगपीठ के साथ साझेदारी की है।” उन्होंने आगे कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दृढ़ विश्वास है कि गांव की प्रगति की नींव गौ है। इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए पतंजलि योगपीठ ने राज्य की पहलों को पूर्ण तकनीकी सहयोग देने का संकल्प लिया है।

इस साझेदारी का उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “गाँव की प्रगति की नींव गौ है” की सोच को आगे बढ़ाना है। इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए, पतंजलि योगपीठ राज्य की पहल को पूरा तकनीकी सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस योजना के तहत, प्रदेश के सभी 75 जिलों में से प्रत्येक में 2 से 10 गौशालाओं को बड़े मॉडल केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इन गौ अभयारण्यों में गायों के मुक्त विचरण के लिए खुले शेड और बाड़ जैसी सुविधाएं भी बनाई जाएंगी।

एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस पहल से बड़े पैमाने पर ग्रामीण रोजगार भी मिलेगा। ग्रामीण लोग गौमूत्र के संग्रहण और उत्पादों की बिक्री में सक्रिय रूप से भाग लेंगे, जिसके लिए उन्हें 50% तक कमीशन मिलेगा। पतंजलि योगपीठ इस कार्यक्रम को प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण, फॉर्मूलेशन, प्रमाणन और लाइसेंसिंग में भी सहयोग देगा। गौशालाओं में जियो-फेंसिंग, गाय टैगिंग और फोटो मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नीम, गौमूत्र और वर्मी-कम्पोस्ट जैसे प्राकृतिक संसाधनों को हर गाँव तक पहुँचाया जाएगा, जिससे किसानों की लागत कम होगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

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