
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 के दंगों से जुड़े एक पुराने और संवेदनशील मामले में आज, बुधवार को एक कुएं की खुदाई शुरू कर दी गई है। यह मामला परचून व्यापारी रामशरण रस्तोगी की निर्मम हत्या और उनके शव को तराजू-बाट बांधकर इस कुएं में फेंकने के आरोप से जुड़ा हुआ है। यह कुआँ संभल कोतवाली क्षेत्र की एकता पुलिस चौकी महमूद खां सराय स्थित मुख्य बाजार में है।
खुदाई का कारण और अधिकारियों का निरीक्षण
संभल हिंसा की बरसी 24 नवंबर 2024 को जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण विश्नोई ने क्षेत्र का निरीक्षण किया था और फुट पेट्रोलिंग भी की थी। कुएँ के ठीक सामने स्थित अकबरपुर मंडी में मृतक रामशरण रस्तोगी के भतीजे सुशील रस्तोगी की दुकान है, जिनसे अधिकारियों ने बातचीत की थी और शिकायत के संबंध में जानकारी ली थी।
शिकायत के आधार पर, डीएम और एसपी ने तुरंत सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार और पालिका ईओ डॉ. मणिभूषण तिवारी को कुएं की खुदाई के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के क्रम में, बुधवार को दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में मजदूरों द्वारा कुएं की खुदाई का काम शुरू किया गया।
पीड़ित परिवार की न्याय की गुहार
मृतक रामशरण रस्तोगी के भतीजे सुशील रस्तोगी ने इस बात की पुष्टि की कि 1978 के दंगों में उनके ताऊ की हत्या कर शव को कुएं में फेंक दिया गया था। मृतक के पोते कपिल रस्तोगी ने भी हाल ही में, 10 फरवरी 2025 को, एसडीएम और डीएम को प्रार्थना पत्र देकर इस पुराने मामले में न्याय की गुहार लगाई थी।
सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने पुष्टि की कि कुएँ का इतिहास बहुत पुराना है और यह 1978 के दंगों से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण डीएम और एसपी के निर्देश पर यह खुदाई का कार्य किया जा रहा है। यह खुदाई 47 साल पुराने दंगे के घावों को कुरेदने और सच्चाई को सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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