US Taiwan Relations: ताइवान के साथ अमेरिका की ₹1 लाख करोड़ की महा-डिफेंस डील, मिला आधुनिक युद्ध का ‘ब्रह्मास्त्र’

ताइवान के साथ अमेरिका की महा-डिफेंस डील

यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की धमकियों को दरकिनार करते हुए ताइवान के साथ 11 अरब डॉलर यानी करीब 1 लाख करोड़ रुपये की महा-डिफेंस डील को मंजूरी देकर वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। राष्ट्रपति की कुर्सी पर वापसी के बाद ट्रंप का यह दूसरा बड़ा सैन्य समझौता है, जिसे बीजिंग के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस रक्षा पैकेज की घोषणा बुधवार देर रात एक नेशनल टेलीविजन संबोधन के दौरान की गई, जिसमें अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि यह बिक्री अमेरिका के राष्ट्रीय, आर्थिक और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए की गई है ताकि क्षेत्र में सैन्य संतुलन और राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।

इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते का सबसे घातक हिस्सा HIMARS (हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम) और ATACMS (आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम) हैं, जिन्हें आधुनिक युद्ध का ‘ब्रह्मास्त्र’ कहा जाता है। ताइवान को मिलने वाले इस बेड़े में 82 HIMARS सिस्टम और 420 ATACMS मिसाइलें शामिल हैं, जो 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक सटीक निशाना साधने और पलक झपकते ही फिर से लोड होने की क्षमता रखती हैं।

यूक्रेन-रूस युद्ध में अपनी शक्ति साबित कर चुके ये हथियार ताइवान की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे। पैकेज के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में 60 सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर सिस्टम, उन्नत सैन्य ड्रोन, जेवलिन और TOW एंटी-टैंक मिसाइलें, और हार्पून मिसाइलों के रिफर्बिशमेंट किट शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत अरबों डॉलर में है।

चीन और ताइवान के बीच दशकों से जारी तनाव के बीच इस महा-डिफेंस डील की टाइमिंग बेहद संवेदनशील है, क्योंकि चीन ताइवान को अपना एक विद्रोही प्रांत मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी देता रहा है। यद्यपि अमेरिका ताइवान को एक स्वतंत्र देश के रूप में औपचारिक मान्यता नहीं देता, लेकिन संघीय कानून के तहत वह ताइवान की आत्मरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।

ट्रंप प्रशासन का यह कदम न केवल ताइवान की सुरक्षा को अभेद्य बनाता है, बल्कि यह चीन के उस प्रभाव को भी चुनौती देता है जिसके तहत वह बार-बार ताइवान के पास सैन्य अभ्यास कर दबाव बनाने की कोशिश करता है। ड्रोन, मिलिट्री सॉफ्टवेयर और हेलीकॉप्टर स्पेयर पार्ट्स जैसी तकनीकी सहायता मिलने से ताइवान की सेना अब किसी भी संभावित चीनी आक्रमण का मजबूती से सामना करने के लिए तैयार होगी।

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