
यूनिक समय, नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट (व्यापार समझौते) की घोषणा की है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले भारी-भरकम आयात शुल्क (टैरिफ) को 50 प्रतिशत से घटाकर मात्र 18 प्रतिशत कर दिया है। ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सफल बातचीत के बाद लिए गए इस फैसले को भारतीय निर्यातकों और अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है।
कैसे 50% से 18% पर आया आंकड़ा?
भारत और अमेरिका के बीच हुए इस बड़े समझौते के तहत कुल टैरिफ का 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत पर आना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत है। पिछले साल अमेरिका ने भारत पर दो अलग-अलग चरणों में टैक्स लगाकर इसे 50 प्रतिशत के भारी स्तर पर पहुंचा दिया था, जिसमें पहला हिस्सा 25 प्रतिशत का ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ था जो भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर लगाए गए टैक्स के जवाब में लगाया गया था।
इस नए समझौते के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस 25 प्रतिशत के रेसिप्रोकल टैरिफ को सीधे तौर पर घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। टैरिफ में इस बड़ी गिरावट का दूसरा मुख्य कारण रूसी तेल की खरीद से जुड़ा वह 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंड शुल्क है जिसे अमेरिका ने अब पूरी तरह से हटा दिया है।
वाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त शुल्क तब हटाया गया जब भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को पूरी तरह बंद करने या बहुत कम करने और उसके स्थान पर अमेरिका या वेनेजुएला से तेल खरीदने की प्रतिबद्धता जताई। इसी रणनीतिक फेरबदल और प्रधानमंत्री मोदी व राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई सफल बातचीत के चलते अब भारतीय उत्पादों पर प्रभावी टैरिफ मात्र 18 प्रतिशत रह गया है, जो जनवरी 2026 में रूसी तेल आयात में आई भारी कमी के बाद संभव हो पाया है।
वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति हुई मजबूत
इस नई व्यवस्था के तहत भारत ने अपने पड़ोसी देशों और प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ दिया है, जहाँ पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों को 19 से 20 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ रहा है, वहीं भारत अब मात्र 18 प्रतिशत टैरिफ के साथ व्यापारिक बढ़त हासिल कर चुका है। तुलनात्मक रूप से देखें तो चीन पर लगा 37 प्रतिशत और ब्राजील पर लगा 50 प्रतिशत का भारी शुल्क भारतीय निर्यातकों के लिए एक सुनहरा अवसर पैदा करता है, जिससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की मांग अमेरिका में तेजी से बढ़ेगी। हालांकि यूरोपीय संघ अभी भी 15 प्रतिशत के टैरिफ के साथ भारत से थोड़ा आगे है, लेकिन एशियाई बाजार में भारत अब अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और किफायती व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है।
ट्रंप-मोदी बातचीत
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि पीएम मोदी से उनकी बातचीत केवल व्यापार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई। समझौते के तहत भारत अब रूस के बजाय अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले को ‘मेड इन इंडिया’ के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिका में कड़ी प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी और देश में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐतिहासिक फैसले का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुआयामी और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जो देश के आर्थिक विकास को एक नई गति प्रदान करेगा। टैरिफ दर में 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने से टेक्सटाइल (कपड़ा), आईटी, और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों के निर्यात में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है, क्योंकि अब भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अन्य देशों के मुकाबले कहीं अधिक किफायती और प्रतिस्पर्धी होंगे। कम टैरिफ का सीधा लाभ लॉजिस्टिक्स और परिचालन लागत में कमी के रूप में दिखेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों का मुनाफा बढ़ेगा और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में अपनी जगह मजबूत करने में मदद मिलेगी।
यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत को अमेरिका के उन ‘चुनिंदा करीबी देशों’ की श्रेणी में ले जा रहा है जिनसे अमेरिका न्यूनतम (10-15%) टैरिफ वसूलता है, जो दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ते रणनीतिक और व्यापारिक विश्वास का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, इस डील से भारत में विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा मिलेगा, नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड की वैश्विक विश्वसनीयता में भारी सुधार होगा।
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