
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू किए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक और व्हाइट हाउस के सलाहकार केविन हैसेट ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने में “हठधर्मी” रवैया अपना रहा है। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस पर दबाव बनाने की अमेरिकी भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
केविन हैसेट का बयान
व्हाइट हाउस की एक बैठक में यूएस नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हैसेट ने कहा कि भारत अपने बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने में अड़ियल रवैया अपना रहा है। यह रिश्ता जटिल है. इसका एक हिस्सा रूस पर दबाव डालने से जुड़ा है ताकि यूक्रेन संघर्ष में शांति समझौता हो सके। उन्होंने कहा कि भारत के साथ ट्रेड टॉक एक मैराथन की तरह है. इसमें उतार-चढ़ाव आते रहेंगे. हैसेट ने संकेत दिया कि अगर भारत अपने रुख पर कायम रहा तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सख्त कदम उठा सकते हैं।
रूस से तेल खरीद बनी मुख्य वजह
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारतीय आयातों पर शुल्क को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। यह टैरिफ राष्ट्रपति ट्रंप के 6 अगस्त, 2025 के कार्यकारी आदेश 14329 के तहत लगाया गया है। अमेरिका चाहता था कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर दे, लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बयान दिया है कि वे देश के किसानों को सबसे पहले रखेंगे। इस बीच आशंका जताई जा रही है कि यह विवाद आने वाले महीनों में FTA (Free Trade Agreement) और Indo-Pacific सहयोग को भी प्रभावित कर सकता है।
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