
यूनिक समय, नई दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 के भव्य शुभारंभ की आधिकारिक घोषणा के साथ ही श्रद्धालुओं का इंतजार समाप्त हो गया है। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर आज टिहरी रियासत के ऐतिहासिक नरेंद्रनगर राजमहल में आयोजित एक विशेष धार्मिक समारोह के दौरान श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के शुभ मुहूर्त की घोषणा की गई।
राजपुरोहितों ने टिहरी महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री और पंचांग गणना के आधार पर यह निर्धारित किया कि भगवान बद्री विशाल के द्वार आगामी 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त में सभी भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। राजमहल में सुबह से ही वेद मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच इस तिथि का निर्धारण किया गया जिससे पूरे उत्तराखंड में हर्षोल्लास का माहौल है और चारधाम यात्रा की विधिवत उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
यात्रा के मुख्य पड़ाव के रूप में गाडू घड़ा यानी तेल कलश यात्रा की तिथि भी 7 अप्रैल 2026 तय की गई है जो इस पावन धाम की परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। इस दिन राजमहल की सौभाग्यवती महिलाएं पूरी पवित्रता के साथ भगवान के महाअभिषेक के लिए तिलों का तेल पिरोने की रस्म निभाएंगी जिसे बाद में एक भव्य कलश में भरकर बद्रीनाथ धाम पहुंचाया जाएगा। बसंत पंचमी के इस मंगल अवसर पर कपाट खुलने की सूचना मिलते ही उत्तराखंड शासन और बद्री-केदार मंदिर समिति ने यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
देश-विदेश से आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों ने इस घोषणा के साथ ही अपनी यात्रा की योजनाएं और होटल बुकिंग शुरू कर दी हैं ताकि वे हिमालय की वादियों में स्थित इस मोक्षधाम के दर्शन का लाभ उठा सकें। प्रशासन के लिए इस बार की यात्रा को और अधिक सुरक्षित और सुगम बनाना एक बड़ी चुनौती है जिसके लिए पैदल मार्गों की मरम्मत और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की इस घोषणा ने न केवल धार्मिक पर्यटन को नई ऊर्जा दी है बल्कि स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के चेहरे पर भी रौनक ला दी है।
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