
यूनिक समय, नई दिल्ली। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह वर्ष 2025 है, लेकिन हिंदू कैलेंडर के हिसाब से यह विक्रम संवत 2082 है। इस विशेष वर्ष की शुरुआत कल नवरात्रि के साथ हो रही है, जो कि चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को होती है। इस दिन को हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। आइए जानें हिंदू नववर्ष के बारे में कुछ दिलचस्प बातें।
हिंदू कैलेंडर और अंग्रेजी कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण अंतर है। जहां अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष 2025 चल रहा है, वहीं हिंदू कैलेंडर में यह 2082 है। इस कारण, हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि इसे 2025 के बजाय 2082 लिखा जाए।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नए साल का आरंभ होता है, और यह दिन खासकर धार्मिक दृष्टि से भी महत्व रखता है। इस दिन को भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि के निर्माण के रूप में भी मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर, जिसे विक्रम संवत कहा जाता है, एक चंद्र-सौर कैलेंडर है, जिसकी शुरुआत 57 ईसा पूर्व में सम्राट विक्रमादित्य द्वारा की गई थी। इस कैलेंडर के अनुसार, हिंदू धर्म से जुड़ी पूजा-पाठ, विवाह, और अन्य धार्मिक कार्यों की तिथियाँ निर्धारित की जाती हैं। विक्रम संवत हर साल 12 महीनों में बांटा जाता है, जिसमें पहला महीना चैत्र और आखिरी महीना फाल्गुन होता है।
विक्रम संवत की गणना
विक्रम संवत की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर की जाती है। यह कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे चलता है, और इसी कारण इस साल हिंदू कैलेंडर का वर्ष 2082 है। हिंदू नववर्ष का महत्व धार्मिक दृष्टि से बहुत गहरा है, और यह न केवल एक नए साल की शुरुआत होती है, बल्कि यह हमारे पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर से भी जुड़ा है।
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