
यूनिक समय, नई दिल्ली। बलूचिस्तान में पाकिस्तान की सेना को अब तक की सबसे बड़ी वैश्विक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बंधक बनाए गए 7 पाकिस्तानी सैनिकों का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में वर्दीधारी सैनिक फुट-फुटकर रोते हुए, अपनी जान की भीख मांगते और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से उन्हें बचाने की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तानी सेना ने अपने ही जवानों को पहचानने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर खुद सैनिक वीडियो में अपना आईडी कार्ड दिखाकर सेना को कोस रहे हैं।
“24 घंटे में मौत की सजा”
BLA ने पाकिस्तान सरकार और सेना को 24 घंटे की अंतिम मोहलत दी है। बलूच विद्रोहियों की मांग है कि अगर पाकिस्तान की जेलों में बंद बलूच कैदियों को रिहा नहीं किया गया, तो इन सातों सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा। विद्रोहियों का दावा है कि ये सैनिक उनके कब्जे में हैं, जबकि पाकिस्तानी सेना इसे ‘फेक वीडियो’ बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है।
“हमें क्यों मरने के लिए छोड़ दिया?”
बलूचिस्तान से सामने आया यह वीडियो पाकिस्तान की सेना के मनोबल को पूरी तरह तार-तार करने वाला है, जिसमें बंधक बनाए गए सैनिकों ने अपनी जान बचाने के लिए बेहद भावुक अपील की है।
जब एक विद्रोही ने उनसे पूछा कि सेना उन्हें अपना बंदा क्यों नहीं मान रही, तो एक सैनिक ने रोते हुए प्रतिवाद किया कि यह शिनाख्ती कार्ड आर्मी का ही है और उन्हीं के द्वारा प्रदान किया गया है, साथ ही उसने अपने परिवार की मज़बूरी का हवाला देते हुए खुदा के वास्ते बचाने की गुहार लगाई।
सैनिकों ने सीधे जनरल असीम मुनीर से तीखा सवाल किया है कि अगर उन्हें अंत में इसी तरह लावारिस और बेसहारा ही छोड़ना था, तो फिर उन्हें फौज में भर्ती ही क्यों किया गया था। पहचान के गहरे संकट से जूझते हुए ये सैनिक बार-बार अपना असली शिनाख्ती कार्ड कैमरे के सामने दिखा रहे हैं ताकि वे पूरी दुनिया को यह साबित कर सकें कि वे कोई फर्जी लोग नहीं, बल्कि असली पाकिस्तानी फौजी हैं जिन्हें उनकी अपनी ही सरकार ने मरने के लिए छोड़ दिया है।
पाकिस्तानी सेना का ‘डिनायल मोड’
पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय और सैन्य प्रवक्ता ने इन सैनिकों से पूरी तरह किनारा कर लिया है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ये वीडियो झूठे हैं और ये लोग पाकिस्तानी सेना के हिस्सा नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना ऐसा इसलिए कर रही है ताकि उसे आतंकवादियों के सामने झुकना न पड़े और कैदियों की अदला-बदली न करनी पड़े, लेकिन इससे सेना के भीतर भारी आक्रोश पनप सकता है।
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