
यूनिक समय, नई दिल्ली। फ्रांस में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अब अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू होने जा रहा है। आज से तीन दिन बाद, यानी 18 अक्टूबर को, अमेरिका में 2500 से अधिक जगहों पर लाखों लोग ‘नो किंग्स’ (No Kings) नाम से विरोध प्रदर्शन करेंगे। चार महीने पहले भी इसी नाम से एक आंदोलन हुआ था, जिसमें पाँच मिलियन से ज्यादा लोगों ने ट्रंप के बढ़ते कार्यकारी अधिकारों (Executive Power) के विस्तार का विरोध किया था।
यह नो किंग्स आंदोलन मुख्य रूप से राष्ट्रपति ट्रंप की ‘राजा जैसी राजनीति’ को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है, जिसका नाम ‘नो किंग्स’ यह संदेश देता है कि अमेरिका किसी राजा का देश नहीं है। आंदोलनकारी और आयोजक संगठन Indivisible तथा कई मजदूर संघों का मानना है कि ट्रंप लोकतांत्रिक सीमाओं को तोड़ रहे हैं, अदालतों की अनदेखी कर रहे हैं, और विरोधी आवाजों तथा मीडिया पर सेंसरशिप लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस विरोध की तात्कालिक वजहों में ट्रंप सरकार की तानाशाही रवैया और हाल ही में संघीय सरकार का बंद (Shutdown) हो जाना शामिल है, जिससे लाखों सरकारी कर्मचारियों की नौकरियों पर असर पड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शटडाउन भी ट्रंप की सत्ता को अपने कब्जे में लेने की एक चाल है। यह आंदोलन मूल रूप से 50501 मूवमेंट से शुरू हुआ था, जिसका अर्थ है 50 राज्यों में 50 प्रदर्शन, एक आंदोलन।
इस आंदोलन को मजदूर संघों, सरकारी कर्मचारियों के संगठनों, और सामाजिक संस्थाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। अमेरिकन फेडरेशन ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज (AFGE) ने भी अपने 8 लाख से ज़्यादा सदस्यों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। हालाँकि, रिपब्लिकन नेता इन प्रदर्शनों को ‘हेट अमेरिका रैली’ या देशविरोधी बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी जानबूझकर शटडाउन हटाने में देरी कर रही है ताकि यह रैली सफल हो सके।
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