
यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत द्वारा सिंधु जल संधि के बाद उत्पन्न तनाव के बीच, अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान को दूसरे मोर्चे पर जल संकट में डालने की योजना का एलान किया है। तालिबान के सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा के निर्देश पर, अफगानिस्तान कुनार नदी पर बिना किसी देरी के बांधों का निर्माण शुरू करने जा रहा है।
तालिबान का त्वरित फैसला:
तालिबान के सूचना उप मंत्री मुजाहिद फराही ने घोषणा की कि जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को कुनार नदी पर बांधों का निर्माण जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश मिले हैं।
ऊर्जा और जल मंत्रालय के प्रमुख मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने कहा है कि अफगान सरकार ने “अन्य विदेशी कंपनियों का इंतजार न करने” और घरेलू कंपनियों के साथ अनुबंध करने का निर्देश दिया है, क्योंकि “अफगानों को अपने पानी का प्रबंधन करने का अधिकार है।”
पाकिस्तान पर असर और महत्व:
कुनार नदी पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है। यह पाकिस्तान के चित्राल क्षेत्र से निकलकर अफगानिस्तान से बहती है और फिर पाकिस्तान लौटकर काबुल नदी से मिल जाती है। पाकिस्तान इस पानी का उपयोग खैबर पख्तूनख्वा में सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए करता है।
तालिबान की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान पहले से ही भारत द्वारा सिंधु नदी जल समझौता रोके जाने के बाद तनाव में है। कुनार नदी पर बांध बनने से पाकिस्तान में पानी के प्रवाह पर गंभीर रोक लग सकती है, जिससे जल की गंभीर किल्लत (जल संकट) शुरू हो सकती है।
इससे पहले, अगस्त में चीन की एक कंपनी ने कुनार नदी पर 2,000 मेगावाट तक बिजली उत्पादन क्षमता वाले तीन बड़े बांधों में निवेश की इच्छा जताई थी। चीन की संभावित भागीदारी इस मुद्दे को संवेदनशील बना देती है, क्योंकि चीन पाकिस्तान का पारंपरिक सहयोगी है। जनवरी में, तालिबान द्वारा इसी नदी पर बांध निर्माण की घोषणा को पाकिस्तानी अधिकारियों ने “शत्रुतापूर्ण कदम” बताया था।
अन्य परियोजनाओं पर भी चिंता:
पाकिस्तान की चिंता केवल कुनार नदी तक सीमित नहीं है। वह पहले ही काबुल नदी पर बनने वाले 12 बांधों को लेकर आपत्ति जता चुका है, जिनमें भारत की सहायता से काबुल शहर को पानी उपलब्ध कराने के लिए बन रहा शहतूत बांध भी शामिल है। भारत ने अफगानिस्तान में पहले सलमा बांध (अफगान-इंडिया फ्रेंडशिप डैम) जैसे प्रोजेक्ट भी पूरे किए हैं। इसके अलावा, तालिबान सरकार हेरात प्रांत में पशदान डैम और अमू दरिया पर कोश टेप नहर प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना है। दोनों देशों के बीच पानी को लेकर कोई समझौता नहीं होने के कारण पाकिस्तान के लिए यह स्थिति मुश्किल है।
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