
यूनिक समय, नई दिल्ली। अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर के शिखर पर किए गए ऐतिहासिक ध्वजारोहण को लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान ने कड़ा विरोध जताया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बयान जारी कर इस घटना को “भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते दबाव” और “मुस्लिम विरासत को मिटाने की कोशिश” का हिस्सा बताया है।
पाकिस्तान का आरोप
ऐतिहासिक ध्वजारोहण को लेकर पाकिस्तान ने कहा कि जिस जगह पहले सदियों पुरानी बाबरी मस्जिद थी, जिसे 6 दिसंबर 1992 को भीड़ ने गिरा दिया था, वहां अब राम मंदिर बनाया गया है। पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय अदालतों ने बाबरी मस्जिद गिराने के आरोपियों को बरी कर दिया और उसी जमीन पर मंदिर निर्माण की इजाजत दी, जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का बड़ा उदाहरण है।
पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों पर दबाव बढ़ रहा है और भारत की कई ऐतिहासिक मस्जिदें खतरे में हैं।
UN से पाकिस्तान की अपील
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि वे भारत में बढ़ते ‘इस्लामोफोबिया’, नफरत, और मुसलमानों पर हमलों पर ध्यान दें तथा अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं।
पाकिस्तान पर भारत में अल्पसंख्यकों पर हिंसा का आरोप
भारत पर झूठा आरोप लगाने वाले पाकिस्तान में खुद अल्पसंख्यकों के साथ बड़े पैमाने पर हिंसा की जा रही है। अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमले और धमकियों की कई घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
2023 में एक चर्च जलाने के आरोप में पकड़े गए 10 लोगों को हाल ही में अदालत ने बरी कर दिया। पाकिस्तान में अक्सर हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी के मामले सामने आते रहते हैं, खासकर सिंध और पंजाब प्रांतों में।
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने इससे पहले 22 जनवरी 2024 को हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की भी निंदा की थी।
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