
यूनिक समय, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने साल 2026 की प्राथमिकताओं को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक समस्याओं का समाधान अब किसी एक या दो महाशक्तियों के हाथ में नहीं है। गुटेरेस ने मल्टी-पोलैरिटी (बहुआयामी व्यवस्था) का पुरजोर समर्थन करते हुए भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए हालिया मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को संतुलित विश्व व्यवस्था की आधारशिला बताया।
अमेरिका और चीन अकेले नहीं सुलझा सकते संकट
गुटेरेस ने वैश्विक शक्तियों के बदलते समीकरणों पर बात करते हुए भविष्य में केवल अमेरिका और चीन के इर्द-गिर्द दुनिया के घूमने की चर्चाओं को उन्होंने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आज की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए देशों के बीच एक व्यापक नेटवर्क और आपसी सहयोग की आवश्यकता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं की घटती हिस्सेदारी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं (जैसे भारत) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, वैश्विक संस्थाओं को नई वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा।
भारत-EU समझौता: 2 अरब लोगों का भविष्य
गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व में हुए इस समझौते को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने बताया कि यह समझौता करीब 2 अरब लोगों के बाजार को जोड़ेगा। इसमें व्यापार के साथ-साथ रक्षा और ‘टैलेंट मोबिलिटी’ (प्रतिभा गतिशीलता) पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
भारत-EU के अलावा इंडोनेशिया, मरकोसुर और ब्रिटेन-चीन व्यापार संबंधों को भी उन्होंने वैश्विक सहयोग की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
भारत के लिए ‘सुरक्षा कवच’ है यह FTA
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इस ऐतिहासिक समझौते पर अपनी सकारात्मक मुहर लगाते हुए कहा है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ने की आशंकाओं के बीच, यह करार भारतीय निर्यातकों को एक स्थिर और विविध बाजार उपलब्ध कराएगा।
इस समझौते के सेक्टर-वार लाभ को देखें तो जहाँ यूरोप के ऑटोमोबाइल, मशीनरी और विमानन जैसे क्षेत्रों को भारत के विशाल बाजार में बड़ी पैठ मिलेगी, वहीं भारत के वस्त्र (Textiles), चमड़ा, समुद्री उत्पाद और रत्न-आभूषण उद्योगों को यूरोपीय बाजारों में तरजीही पहुंच का सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा, उच्च मूल्य वाले विदेशी बाजारों तक आसान पहुंच होने से भारत की वैश्विक मूल्य शृंखला (Global Value Chain) में भागीदारी बढ़ेगी, जिससे न केवल छोटे उद्योगों (MSME) को लाभ होगा, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सुरक्षा परिषद और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर रुख
एंतोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर टिप्पणी करते हुए याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की मूल जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत सिर्फ़ सुरक्षा परिषद ही बाध्यकारी फ़ैसले ले सकती है और बल प्रयोग की अनुमति दे सकती है।
उन्होंने सुरक्षा परिषद में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि जो लोग संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं, वे अक्सर वही लोग होते हैं जो इसके सुधार का विरोध करते हैं, जिससे यह संस्था उतनी प्रभावी नहीं बन पाती जितनी उसे होना चाहिए।
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