
यूनिक समय, नई दिल्ली। विज्ञान ने आज उस कल्पना को सच कर दिखाया है जिसे हम ‘स्मार्ट डस्ट’ (Smart Dust) कहते थे। पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय (UPenn) और मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मिलकर दुनिया के सबसे छोटे, पूरी तरह से प्रोग्राम करने योग्य और स्वायत्त (Autonomous) माइक्रो-रोबोट विकसित किए हैं। ये नन्हे रोबोट इतने सूक्ष्म हैं कि इन्हें नग्न आंखों से देखना भी मुश्किल है, लेकिन इनकी क्षमताएं दुनिया बदलने वाली हैं।
सूक्ष्म आकार, विशाल दिमाग
इन माइक्रो-स्विमर रोबोट्स का आकार मात्र 0.2 x 0.3 x 0.05 मिलीमीटर है, जो इन्हें लगभग एक सूक्ष्मजीव (Micro-organism) जितना छोटा बनाता है। ये रोबोट न केवल तापमान में बदलाव को महसूस कर सकते हैं, बल्कि उसके अनुसार अपने व्यवहार को भी बदल सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, एक रोबोट को तैयार करने की लागत महज एक पेनी (करीब 85 पैसे) के बराबर है, जिससे इन्हें बड़े पैमाने पर बनाना संभव होगा।
प्रकाश से मिलने वाली ‘दिमागी’ शक्ति
इन रोबोट्स को ऊर्जा देने के लिए किसी भारी बैटरी की जरूरत नहीं है। मिशिगन विश्वविद्यालय ने इसमें एक ऐसा ‘ब्रेन’ लगाया है जो अविश्वसनीय रूप से कम पावर—सिर्फ 75 नैनोवॉट पर चलता है। यह एक स्मार्टवॉच की तुलना में 1 लाख गुना कम बिजली खपत है। रोबोट के अधिकांश हिस्से पर सूक्ष्म सोलर पैनल लगे हैं, जो प्रकाश (Light) को ऊर्जा में बदलकर इसे सोचने और चलने की शक्ति देते हैं।
पानी में तैरने का ‘आयोनिक’ स्टाइल
माइक्रो-लेवल पर पानी गाढ़े शहद की तरह व्यवहार करता है, जिससे सामान्य तरीके से तैरना असंभव होता है। इसमें पंख या चप्पू जैसे हिलने वाले पुर्जे नहीं हैं। इसके बजाय, यह एक इलेक्ट्रिकल फील्ड बनाता है जो पानी के आयनों (Ions) को धक्का देता है। पुर्जों के घिसने का डर न होने के कारण ये रोबोट महीनों तक पानी या तरल पदार्थों में तैरते रह सकते हैं।
भविष्य का ‘नन्हा डॉक्टर’
वैज्ञानिकों का दावा है कि ये रोबोट आने वाले समय में मेडिकल फील्ड की दिशा बदल देंगे। ये सीधे कैंसर कोशिकाओं या संक्रमित ऊतकों तक जाकर दवा पहुंचा सकेंगे।रक्त वाहिकाओं के भीतर से ये रियल-टाइम में शरीर की जांच कर सकेंगे।मछलियों के झुंड की तरह ये लाखों रोबोट एक साथ मिलकर जटिल मैन्युफैक्चरिंग या सर्जिकल टास्क पूरे कर सकेंगे।
National Science Foundation द्वारा समर्थित यह रिसर्च अब Science Robotics और PNAS जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हो चुकी है, जो नैनो-टेक्नोलॉजी के युग की शुरुआत का संकेत है।
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