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यूनिक समय, मथुरा। बिजनेस में सफलता पाने के लिए गारनेट पहनने सुझाव आमतौर पर दिया जाता है। गारनेट एक उपरत्न है जो काला, लाल, हरा, नीला जैसे अनेक रंगों में पाया जाता है लेकिन ज्यादातर लाल गारनेट ही पहना जाता है। इसे रक्तमणि भी कहा जाता है। आगे जानिए इस रत्न से जुड़ी खास बातें
गारनेट के प्रमुख ग्रह स्वामी मंगल और राहु हैं। मंगल भाग्य और धन का देवता है और राहु आकस्मिक सफलता दिलाने वाला ग्रह है। राहु का संबंध लाटरी, सट्टा, शेयर मार्केट आदि से होता है। इसलिए गारनेट पहनने से इन सभी कामों में तेजी से लाभ मिलता है।
बिजनेस में सफल होने के लिए जन्मकुंडली में बुध के साथ मंगल का शुभ होना भी आवश्यक होता है। कुंडली का द्वितीय भाव धन स्थान होता है, यदि इस स्थान पर मंगल है तो अवश्य ही गारनेट पहनने की सलाह दी जाती है ताकि धन स्थान का प्रभाव अधिक बढ़ सके। गारनेट पहनने से आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है और आत्मविश्वास बना रहता है। इससे निगेटिव एनर्जी भी दूर रहती है।
गारनेट का सीधा संबंध बिजनेस से है। व्यापार में सफलता के लिए चांदी की अंगूठी में गारनेट पहनना चाहिए। व्यापारियों को कम से कम 10 ग्राम का गारनेट अपने कार्यस्थल की तिजोरी में रखना चाहिए। जो लोग ज्यादातर टूर पर रहते हैं। टूरिंग जॉब करते हैं उन्हें गारनेट पहनना चाहिए। यह ट्रेवलिंग के दौरान सुरक्षा करता है।
गारनेट उन लोगों को विशेषतौर पर पहनना चाहिए जिनके मन में अनजाना भय रहता है, जो हमेशा असुरक्षित महसूस करते हैं, जिनमें इनसिक्योरिटी की भावना रहती है। गारनेट की मूल धातु चांदी है। इसे चांदी की अंगूठी, ब्रेसलेट या पेंडेंट के रूप में पहना जा सकता है। इसे अनामिका अंगुली में पहनना चाहिए।
गारनेट पहनने से पहले किसी ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
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