
यूनिक समय, मथुरा। ब्रजभाषा साहित्य, लोककला संस्थान और श्रीजी लोक कला संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में वृंदावन शोध संस्थान में 15 दिवसीय लोकनृत्य एवं लोकगायन प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आकाशवाणी मथुरा के पूर्व निदेशक नरेश मल्होत्रा ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और ब्रज की शास्त्रीय लोकशैली को समझने और आत्मसात करने की प्रेरणा दी।
मुख्य अतिथि के रूप में ओडिशी नृत्यांगना कुंजलता बेहरा ने लोक कलाओं और भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं के मध्य समन्वय की सुंदर व्याख्या प्रस्तुत की। लोकगायक जगदीश ब्रजवासी ने ब्रजभाषा की शुद्धता और लोकगायन की विभिन्न विधाओं पर विस्तृत जानकारी दी।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सीमा मोरवाल ने लोकगीतों और नृत्यों को प्रकृति से जुड़ा बताया, जिससे यह सीधे मन को आकर्षित करते हैं। वहीं ब्रज संस्कृति संग्रहालय की क्यूरेटर ममता गौतम ने ब्रज की संगीत परंपरा की जड़ों को आदिकाल तक बताया।
संस्थान के सचिव प्रवीण गुप्ता ने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी ने सभी को अपने क्षेत्रीय लोक कलाओं और भाषा के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में विद्यालयों और महाविद्यालयों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की, जो ब्रज लोक संस्कृति के प्रति युवाओं की जागरूकता को दर्शाता है।
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