Sun, Jun 14th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

शुभ घड़ी में राघव-सिया घर आए माताओं के चेहरे खिलखिलाएं

by tanuja • January 23, 2024
Advertisement
Ad

प्राण प्रतिष्ठा की शुभ बेला में शिशु जनने के बाद परिवार की खुशियां दोहरी हो गई हैं। माताओं ने कहा, ये बच्चे नहीं भगवान के प्रसाद हैं। भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के दिन अस्पतालों में बच्चों को जन्म देने वाली माताएं स्वंय को धन्य महसूस कर रहीं थी।

अयोध्या में सोमवार को जब प्रभु श्रीरामलला की अपने दिव्य व भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, उसी ऐतिहासिक बेला में कई अस्पतालों में भी किलकारियां गूंजीं। सीता-राम रूपी शिशुओं को जनने के बाद माताओं के चेहरे खिलखिला उठे। अधिकतर ने उसी क्षण प्रभु श्रीराम व जगतजननी माता सीता के नाम पर उनका नामकरण कर दिया। शिशुओं को उन्हीं के आदर्शों पर चलने की सीख देने का संकल्प भी लिया।

इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हुए प्राण प्रतिष्ठा से मातृत्व को जोड़ने के लिए गर्भवती महिलाएं एक दिन पहले से ही अस्पतालों में भर्ती हो गईं। सुबह से ही लोग प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा की शुभ घड़ी की प्रतीक्षा में थे, वहीं ये माताएं भी शिशुओं को उसी मुहूर्त में जनने को लालायित थीं। असहनीय पीड़ा को भी बर्दाश्त करके जिले के अस्पतालों में 12 माताओं ने जैसे ही शिशुओं को जन्म दिया, मानो उनके दर्द स्वत: हर उठे। इसे यादगार बताते हुए सभी ने शिशुओं को प्रभु श्रीराम व माता सीता के आदर्शों पर चलने की सीख देने का संकल्प भी लिया।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी चौहान के अस्पताल में शहर के शंकरगढ़ निवासी शरद यादव की पत्नी साधना यादव ने बालक को जन्म दिया। ऑपरेशन के दर्द से अधिक उन्हें इस शुभ बेला में पुत्र जनने की खुशी थी। शरद ने बताया कि आज पुत्र का जन्म हुआ है, यह उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बेटे का नाम राघव रख दिया है।

शहर के बेनीगंज निवासी निशांत श्रीवास्तव की पत्नी अर्चना श्रीवास्तव ने एक पुत्री को जन्म दिया। निशांत ने बताया कि उनके पहले से एक पुत्र था, माता सीता के रूप में जन्मी पुत्री से परिवार पूरा हो गया। परिवार के लोगों ने मिलकर पुत्री का नाम सिया रख दिया है। इसी तरह अन्य अस्पतालों में भी माताएं शिशुओं को जनने के बाद स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही थीं।

महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि सात शिशुओं का जन्म हुआ है। इनमें चार बालिका व तीन बालक हैं। मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रीना शर्मा ने बताया कि गुंजन व शिल्पा नामक मरीजों ने दो बालकों को जन्म दिया है।

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.