
यूनिक समय, नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि जब उनकी पार्टी सत्ता में थी, तब जाति जनगणना नहीं करवा पाना उनकी बड़ी चूक थी। उन्होंने कहा कि दलित और आदिवासी वर्गों की समस्याओं को समझना आसान है, लेकिन ओबीसी वर्ग की परेशानियों को समझना उतना सरल नहीं था। राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक अनुभव का आकलन करते हुए माना कि ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा में वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाए क्योंकि उन मुद्दों को वे उस समय गहराई से नहीं समझ पाए थे।
उन्होंने कांग्रेस के ‘ओबीसी भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में कहा कि यदि उन्हें तब ओबीसी के इतिहास और समस्याओं की सही जानकारी होती, तो वे तत्काल जाति जनगणना करवाने के लिए कदम उठाते। राहुल गांधी ने इस कमी को कांग्रेस की नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत गलती माना।
जाति जनगणना को लेकर उन्होंने इसे देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल बताया, जिसने राजनीतिक परिस्थितियों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी डेटा की है और इस डेटा की ताकत को समझना जरूरी है। राहुल गांधी ने तेलंगाना सरकार के डेटा के उदाहरण के जरिए बताया कि कैसे आज के समय में डेटा के माध्यम से किसी भी क्षेत्र या वर्ग की सही जानकारी हासिल की जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और आरएसएस ओबीसी के इतिहास को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि दलित, आदिवासी और ओबीसी देश की उत्पादक शक्ति हैं, लेकिन उन्हें उनका उचित हिस्सा नहीं मिल पा रहा है। राहुल गांधी ने भरोसा जताया कि वे जाति जनगणना के मुद्दे से पीछे नहीं हटेंगे और इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगे।
संक्षेप में, राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान जाति जनगणना न कराने की गलती स्वीकार की और इसे सुधारने के लिए प्रतिबद्धता जताई, साथ ही ओबीसी समुदाय के मुद्दों को पहले से बेहतर समझने की जरूरत पर जोर दिया।
ये भी पढ़ें:- उदयपुर डेंटल कॉलेज में छात्रा ने की आत्महत्या, कॉलेज स्टाफ पर मानसिक उत्पीड़न के लगाए आरोप
Leave a Reply