
यूनिक समय, नई दिल्ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने को अत्यंत महत्वपूर्ण दिन बताया, और इस अवसर को स्मृति दिवस के रूप में आयोजित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। सीएम योगी ने कहा कि वन्दे मातरम् भारत की आजादी के आंदोलन का अमर मंत्र बन गया था। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने विदेशी यातनाओं की परवाह किए बिना इस गीत के साथ गाँव-नगर में प्रभातफेरी के माध्यम से भारत की सामूहिक चेतना के जागरण में खुद को जोड़ा था।
सीएम योगी ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया और कहा कि 1875 में रचा गया यह गीत केवल आजादी का नहीं, बल्कि आजादी के मंत्र को बढ़ाने में भी सफल रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गीत भले ही संस्कृत और बांग्ला की अभिव्यक्ति हो, लेकिन यह संपूर्ण भारत को राष्ट्र माता के भाव के साथ जोड़ने वाला अमर गीत बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब 1905 में विदेशी हुकूमत ने बंग-भंग का दुस्साहसिक निर्णय लिया, तब भी इस गीत ने पूरे भारतवासियों को एकजुट होकर प्रतिकार करने की प्रेरणा दी। उन्होंने याद दिलाया कि बाद के कालखंड में, जब भी किसी क्रांतिकारी ने फांसी के फंदे को चूमा, तब उनके मुख से वन्दे मातरम् मंत्र ही निकलता रहा। सीएम योगी ने कहा कि वन्दे मातरम् संपूर्ण भारत की सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है और देश को एकता के सूत्र में बांधने वाला मंत्र बना।
इस अवसर पर, लोकभवन में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन हुआ और स्वदेशी का संकल्प लिया गया। सीएम योगी ने वहाँ उपस्थित लोगों को प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी दिखाया।
सीएम ने कहा कि संविधान सभा ने इस गीत को 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी। उन्होंने पीएम मोदी के कथन का ज़िक्र करते हुए कहा कि वन्दे मातरम् हमें जाति, मत और मजहब से ऊपर उठकर राष्ट्रप्रथम के भाव के साथ कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है।
सीएम योगी ने कहा कि जब एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार डालता है, जब एक सैनिक विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए भी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए डटा रहता है (सियाचिन ग्लेशियर में खड़ा एक सैनिक माइनस 40 डिग्री तापमान का सामना करता है, और राजस्थान के रेगिस्तान में मई-जून में सीमाओं की रक्षा करने वाला एक सैनिक 55 डिग्री तापमान में भी गर्मी की परवाह किए बिना सीमाओं की रक्षा के लिए संघर्ष करता है), जब एक किसान खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाकर अन्न पैदा करता है, और जब भारत का प्रत्येक नागरिक स्वार्थ से ऊपर उठकर कर्तव्य पथ पर अग्रसर होता है, तब सच्चे अर्थों में वह वंदे मातरम गा रहा होता है।
इस दौरान मुख्य सचिव एसपी गोयल, प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार आदि उपस्थित थे।
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