
लखनऊ ब्यूरो|यूनिक समय, लखनऊ/ मथुरा। वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट विधेयक 2025 को राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद अधिनियम के रूप में सोमवार को अधिसूचित कर दिया गया है। यह विधेयक पहले विधानसभा और विधान परिषद से पारित हो चुका था।
नए कानून के लागू होने से मंदिर प्रबंधन के लिए एक वैधानिक ढांचा अस्तित्व में आया है। दरअसल, स्वीकृत कानून का मुख्य उद्देश्य ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के प्रशासन को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। इसको बनाने को लेकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और व्यवस्था संचालन में स्पष्टता लाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। इससे पहले 6 अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन के लिए वैधानिक ट्रस्ट बनाए जाने संबंधी अध्यादेश पर कड़ी टिप्पणी की थी। सुनवाई के दौरान एकल न्यायाधीश ने मंदिर के प्रशासन को अपने नियंत्रण में लेने के राज्य सरकार के प्रयास की आलोचना करते हुए कहा था कि सरकार ने इस कदम से ‘पाप’ किया है और मंदिर को उसके हाल पर छोड़ने की सलाह दी थी।
अब नया कानून जानें
नए कानून में स्पष्ट किया गया है कि ठाकुर बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा समस्त चढ़ावा दान और चल-अचल संपत्तियां न्यास के अधिकार क्षेत्र में होंगी। इसमें मंदिर में विराजमान विग्रह, मंदिर परिसर और परिक्रमा क्षेत्र में देवताओं को अर्पित सभी प्रकार की भेंट, नकद या वस्तु रूप में दिया गया दान, पूजा-पाठ, उत्सव, धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दी गई संपत्ति और डाक या तार के माध्यम से भेजे गए बैंक ड्राफ्ट और चेक भी शामिल होंगे।
राज्य सरकार ने मंदिर को लेकर क्या कहा
इस विषय पर राज्य सरकार का कहना है कि न्यास का गठन स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। उनके समय से चली आ रही धार्मिक रीति-रिवाज, पर्व, उत्सव और अनुष्ठान बिना किसी हस्तक्षेप के यथावत जारी रहेंगे। न्यास गठन के बाद मंदिर परिसर में भक्तों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
इसमें प्रसाद वितरण की बेहतर व्यवस्था, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल सुविधा, बैठने के लिए बेंच, प्रवेश और कतार प्रबंधन के लिए कियोस्क, गौशाला, अन्नक्षेत्र, रसोई, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाओं का विकास शामिल है।
न्यास में कुल 18 सदस्य होंगे। न्यास की बैठक हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी, जिसकी सूचना कम से कम 15 दिन पहले देनी होगी। न्यास को 20 लाख रुपये तक की चल या अचल संपत्ति स्वयं क्रय करने का अधिकार होगा, जबकि इससे अधिक राशि के मामलों में सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी। न्यास का मुख्य कार्यपालक अधिकारी एडीएम स्तर का अधिकारी होगा।
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