Indore: देश के ‘सबसे स्वच्छ शहर’ में दूषित पानी से 7 लोगो की मौत; 1000 से ज्यादा लोग बीमार

इंदौर में दूषित पानी से 7 लोगो की मौत

यूनिक समय, नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव रखने वाले इंदौर से एक बेहद डरावनी और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर स्थिति में अस्पतालों में भर्ती हैं। स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही का आलम यह है कि जिस पाइपलाइन से लोगों के घरों में पीने का पानी पहुँच रहा था, वह सीधे एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही थी और लीकेज के कारण मल-मूत्र वाला पानी नलों में पहुँच गया।

संजीवनी क्लीनिकों में बेड कम पड़े

इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बातचीत में 7 मौतों की पुष्टि की है, हालांकि आधिकारिक रिकॉर्ड में अभी 3 मौतें दर्ज हैं। अब तक 1000 से ज्यादा लोगों का प्राथमिक उपचार किया जा चुका है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की दर्जनों टीमें घर-घर जाकर बीमार लोगों को चिन्हित कर रही हैं, क्योंकि उल्टी-दस्त की समस्या तेजी से फैल रही है।

घोर लापरवाही

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पूरे इलाके की मुख्य पेयजल लाइन एक सार्वजनिक शौचालय के ठीक नीचे स्थित है। पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण ड्रेनेज और शौचालय का गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल गया। स्थानीय निवासी पिछले कई दिनों से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया।नई पाइपलाइन के लिए ढाई करोड़ का टेंडर 4 महीने पहले ही हो चुका था, लेकिन काम शुरू न होने के कारण यह त्रासदी हुई।

मुख्यमंत्री का कड़ा एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्काल कड़े कदम उठाए हैं। संबंधित जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। एक उप यंत्री (Sub-Engineer) की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी को पूरे मामले की गहराई से जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

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