
यूनिक समय, नई दिल्ली। आर्थिक तंगहाली और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी के साथ हुई है। खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार की खोज की गई है जिसने देश की घरेलू ऊर्जा संभावनाओं को नई उम्मीद दी है। पाकिस्तान की ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड यानी OGDCL ने इस महत्वपूर्ण सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि खैबर-पख्तूनख्वा में 5170 मीटर की रिकॉर्ड गहराई तक की गई खुदाई के बाद 187 मीटर चौड़ा हाइड्रोकार्बन युक्त क्षेत्र मिला है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस खोज को राष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है और संबंधित विभागों की पीठ थपथपाई है। उन्होंने एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्थानीय स्तर पर संसाधनों की खोज को प्राथमिकता देने से पाकिस्तान को पेट्रोलियम आयात पर खर्च होने वाली बेशकीमती विदेशी मुद्रा बचाने में बड़ी मदद मिलेगी।
इस नए भंडार की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से प्रतिदिन 4100 बैरल कच्चे तेल के साथ-साथ करीब 1 करोड़ 5 लाख क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का उत्पादन होने की उम्मीद है। तकनीकी विशेषज्ञों ने केस्ड-होल-ड्रिल स्टेम टेस्ट के जरिए इस कुएं की व्यवहार्यता की पुष्टि कर दी है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना में OGDCL मुख्य संचालक की भूमिका में है जबकि पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड के पास 30 प्रतिशत और गवर्नमेंट होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के पास 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में दिसंबर 2025 में बारागजई X-01 कुएं से भी व्यावसायिक उत्पादन सफलतापूर्वक शुरू किया जा चुका है जो पाकिस्तान के बढ़ते ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भविष्य की योजनाओं को लेकर पाकिस्तान सरकार और OGDCL अब काफी आक्रामक रुख अपना रहे हैं। कंपनी अपने शेल गैस कार्यक्रम का विस्तार करने की तैयारी में है जिसके तहत साल 2026-27 तक परीक्षण कुओं की संख्या को बढ़ाकर पांच से छह किया जाएगा। इस कार्यक्रम की सफलता के आधार पर आने वाले समय में कुओं की संख्या को 1000 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है जिससे प्रतिदिन लाखों स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट गैस का उत्पादन संभव हो सकेगा।
यदि यह परियोजना सही दिशा में आगे बढ़ती है तो यह न केवल पाकिस्तान की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि लंबे समय से चरमराई हुई अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
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