Fri, Jun 5th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

Wolf Moon 2026: 3 जनवरी को दिखेगा ‘वुल्फ मून’; सूर्य के सबसे करीब पहुंचेगी पृथ्वी, जानें इस अद्भुत संयोग का रहस्य

by Tarun Bhardwaj • January 2, 2026
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। नए साल 2026 की शुरुआत खगोल प्रेमियों के लिए किसी सुनहरे तोहफे से कम नहीं होने वाली है। आगामी 3 जनवरी को आसमान में एक दुर्लभ और भव्य नजारा दिखाई देगा, जब जनवरी की पहली पूर्णिमा यानी ‘वुल्फ मून’ (Wolf Moon) का दीदार होगा। खास बात यह है कि इसी दिन पृथ्वी, सूर्य के सबसे निकटतम बिंदु पर भी होगी, जिसे विज्ञान की भाषा में उपसौर (Perihelion) कहा जाता है।

क्या है ‘वुल्फ मून’ और क्यों पड़ा यह नाम?

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, जनवरी की पूर्णिमा को ‘वुल्फ मून’ के नाम से जाना जाता है। इसके पीछे एक रोचक लोककथा जुड़ी है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, सर्दियों के इन दिनों में भेड़िये भोजन की तलाश में निकलते थे और चांद को देखकर तेज़ आवाज़ें (Howling) निकालते थे, जिसके कारण इसका नाम ‘वुल्फ मून’ पड़ गया।

3 जनवरी की रात चंद्रमा पृथ्वी के काफी करीब होगा, जिससे यह सामान्य पूर्णिमा के मुकाबले ज्यादा बड़ा और 15% अधिक चमकीला नजर आएगा। यदि मौसम साफ रहा, तो इसे बिना किसी दूरबीन के नग्न आंखों से देखा जा सकेगा।

सूर्य के आगोश में होगी पृथ्वी

3 जनवरी को ही खगोल विज्ञान की एक और महत्वपूर्ण घटना होगी। भारतीय समयानुसार रात लगभग 10:45 बजे पृथ्वी अपनी कक्षा में घूमते हुए सूर्य के सबसे नजदीक बिंदु पर पहुंच जाएगी। इस दौरान पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी घटकर मात्र 14 करोड़ 70 लाख 99 हजार 894 किमी रह जाएगी। उपसौर की स्थिति में पृथ्वी की रफ्तार सबसे तेज होती है। इस दिन पृथ्वी 30.27 किमी प्रति सेकंड की रफ़्तार से अपनी कक्षा में दौड़ेगी। इसके विपरीत, जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होगी (अपसौर), वह दिन 6 जुलाई 2026 को पड़ेगा।

पूर्णिमा और माघ स्नान का आरंभ

खगोलीय घटना के साथ-साथ यह दिन धार्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत पावन है। 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में खुशहाली आती है। इसी दिन से तीर्थ क्षेत्रों में पवित्र माघ स्नान की भी औपचारिक शुरुआत हो जाती है।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: India News: IIT मद्रास में गरजे एस. जयशंकर; ‘पड़ोसियों के लिए उठती हुई लहर है भारत की तरक्की’

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.