
यूनिक समय, वृन्दावन। केशव धाम में सोमवार से संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बेहद महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है जिसकी अध्यक्षता स्वयं संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत कर रहे हैं। इस बैठक से पहले रविवार को हुई परिचय बैठक में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, डॉ. कृष्ण गोपाल और मनमोहन वैद्य सहित कई दिग्गज केंद्रीय पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इस महामंथन का मुख्य केंद्र संगठन के आगामी 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जाने वाले अभियान हैं। संघ ने योजना बनाई है कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर गांव-गांव में सभाएं आयोजित की जाएंगी ताकि अधिक से अधिक लोगों को संघ की विचारधारा से जोड़ा जा सके और समाज में समरसता का भाव जागृत किया जा सके।
इस बैठक के एजेंडे में केवल संगठनात्मक विस्तार ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के वर्तमान हालात भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार पदाधिकारियों ने बांग्लादेश में हो रही हिंसक घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की स्थिति एवं विभिन्न प्रदेशों में हो रहे पलायन को रोकने के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार करने पर भी गहन मंथन किया गया है।
आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भी इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती और सामाजिक समीकरणों को साधने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। सुरक्षा की दृष्टि से केशव धाम को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है जहां पुलिस बल के साथ-साथ स्वयंसेवकों का कड़ा पहरा है और आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत का यह वृंदावन प्रवास सात दिनों का है जिसके दौरान वे आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों में भी शामिल होंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार 10 जनवरी को वे चंद्रोदय मंदिर जाकर ठाकुरजी के दर्शन करेंगे और वहां की अत्याधुनिक सेंट्रल किचन का अवलोकन करेंगे। इसके बाद वे सुदामा कुटी में आयोजित संत सुदामा दास महाराज के शताब्दी समारोह में शामिल होकर संतों का आशीर्वाद लेंगे।
चर्चा यह भी है कि इस प्रवास के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी संघ प्रमुख से भेंट करने वृंदावन आ सकते हैं। यह बैठक न केवल संघ के आंतरिक विस्तार के लिए बल्कि आने वाले समय में देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।
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