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Mathura News: बरेली और बदायूं के बीच बनेंगे दो नए टोल प्लाजा; 2027 तक मेगा परियोजना होगी तैयार

by Tarun Bhardwaj • January 5, 2026
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यूनिक समय, मथुरा। बरेली से मथुरा के बीच बन रहे 228 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे के फेज-फोर (बरेली-बदायूं खंड) के निर्माण कार्य ने अब गति पकड़ ली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब उन स्थानों का चयन भी कर लिया गया है जहां यात्रियों से टोल वसूला जाएगा। प्राधिकरण के अनुसार बदायूं के कछला और बरेली के देवचरा के पास दो हाई-टेक टोल प्लाजा स्थापित किए जाएंगे जिसका अर्थ है कि आने वाले समय में बरेली से बदायूं और मथुरा की यात्रा करने वाले लोगों को इन दो बिंदुओं पर टोल चुकाना होगा। वर्तमान में इस मार्ग पर कोई टोल व्यवस्था लागू नहीं है लेकिन हाईवे के आधुनिक स्वरूप में आने के साथ ही यह नई व्यवस्था शुरू हो जाएगी।

लगभग 7,700 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाली इस परियोजना को चार चरणों में विभाजित किया गया है जिसमें से मथुरा से कासगंज के बीच करीब 60 प्रतिशत और कासगंज से बदायूं के बीच 50 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा कर लिया गया है। अब पूरा ध्यान बरेली-बदायूं खंड पर केंद्रित है जहां निर्माण कार्य को 2027 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस खंड की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 650 करोड़ रुपये की लागत से चार नए बाइपास बनाए जा रहे हैं। इनमें भमोरा और देवचरा के बीच पांच किलोमीटर लंबा बाइपास प्रमुख है जबकि बिनावर और मलगांव के पास भी बाइपास का निर्माण कराया जा रहा है। मलगांव में रेलवे क्रॉसिंग की समस्या को खत्म करने के लिए एक रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण भी प्रस्तावित है।

पूरी परियोजना के तकनीकी ढांचे पर नजर डालें तो इसमें कुल 20 फ्लाईओवर, 26 अंडरपास, 5 बड़े पुल और 6 रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं जो यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाएंगे। इस ग्रीन कॉरिडोर के तैयार होने से न केवल आगरा, मथुरा, हाथरस, कासगंज, बदायूं और बरेली बल्कि उत्तर प्रदेश के 25 से अधिक जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। यह हाईवे गंगा एक्सप्रेस-वे और मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे के साथ जुड़कर एक ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार करेगा जिससे क्षेत्र में औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक उत्कर्ष शुक्ला के अनुसार निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए मशीनरी और श्रम बल को बढ़ा दिया गया है ताकि यात्रियों को जल्द से जल्द विश्वस्तरीय सड़क सुविधा मिल सके।

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