Fri, Jun 5th, 2026
Advertisement
Ad
Advertisement
Ad

Business: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25% ‘टैरिफ से भारत के कारोबार पर कितना पड़ेगा असर, जानिए?

by Tarun Bhardwaj • January 13, 2026
Advertisement
Ad

यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा आर्थिक प्रहार करते हुए ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों के लिए ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए यह सनसनीखेज एलान किया कि जो भी देश ईरान के साथ किसी भी प्रकार का कारोबार करेगा, उसे अमेरिका के साथ होने वाले अपने कुल व्यापार पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ चुकाना होगा। ट्रंप ने इस आदेश को ‘अंतिम और निर्णायक’ करार देते हुए इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है।

भारत के लिए बड़ी चुनौती

ट्रंप का यह फैसला भारत के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है। गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही भारत पर कई क्षेत्रों में 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। अब ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों के कारण लगने वाला यह अतिरिक्त 25% बोझ भारतीय निर्यातकों की कमर तोड़ सकता है।

ओईसी (OEC) के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत और ईरान के बीच लगभग 2.21 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। इसमें भारत का निर्यात 1.19 अरब डॉलर और आयात 1.02 अरब डॉलर रहा।

भारत बड़े पैमाने पर ईरान को चावल (734 मिलियन डॉलर), सोयाबीन और चाय की सप्लाई करता है। नए टैरिफ नियमों के कारण अब भारतीय कृषि क्षेत्र और फार्मा सेक्टर पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

चाबहार बंदरगाह

भारत और ईरान के सदियों पुराने संबंधों का सबसे मजबूत स्तंभ चाबहार बंदरगाह रहा है। मई 2024 में ही भारतीय कंपनी IPGL ने इस बंदरगाह के संचालन के लिए 10 साल का नया अनुबंध किया था। चाबहार न केवल भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक कनेक्टिविटी देता है, बल्कि यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का मुकाबला करने के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ट्रंप की इस नई घोषणा के बाद अब चाबहार प्रोजेक्ट के भविष्य और इसमें होने वाले निवेश पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

इन देशों पर भी गिरेगी गाज

ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में भारत के अलावा चीन, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), पाकिस्तान और आर्मेनिया शामिल हैं। ट्रंप की रणनीति स्पष्ट है—वे वैश्विक शक्तियों को यह चुनने पर मजबूर कर रहे हैं कि वे या तो ईरान के साथ व्यापार करें या फिर अमेरिकी बाजार तक अपनी पहुंच बनाए रखें। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत-ईरान संबंध सभ्यतागत और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत मजबूत हैं। लेकिन ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने इन ऐतिहासिक संबंधों के बीच व्यापारिक बाधाओं की एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी है।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: World News: ट्रंप का ‘ईरान’ पर महाप्रहार; ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगेगा 25% टैरिफ

Advertisement
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.