Gwalior: संत रामभद्राचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद पर उठाए सवाल; बोले “अन्याय उनके साथ नहीं हुआ है…”

Sant Rambhadracharya has raised questions about Avimukteshwaranand

यूनिक समय, नई दिल्ली। अपने प्रखर विचारों और सनातन धर्म के अगाध ज्ञान के लिए प्रसिद्ध जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने ग्वालियर प्रवास के दौरान विभिन्न समसामयिक और धार्मिक विवादों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने विशेष रूप से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर तीखे हमले किए, जिससे धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

“अविमुक्तेश्वरानंद अभी जगद्गुरु भी नहीं हैं”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सरकार पर अन्याय किए जाने के आरोपों पर पलटवार करते हुए संत रामभद्राचार्य ने कहा कि अन्याय उनके साथ नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने स्वयं नियमों का उल्लंघन कर अन्याय किया है। उन्होंने मर्यादाओं का हवाला देते हुए कहा, “नियम यह है कि गंगा तट पर रथ से नहीं जाया जाता। हम स्वयं संगम तक पैदल जाते हैं। जब पुलिस ने रोका था, तो उन्हें रुकना चाहिए था।”

इतना ही नहीं, संत रामभद्राचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं जगद्गुरु हूं, वो तो अभी जगद्गुरु भी नहीं हैं। अभी सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शंकराचार्य बनाया ही नहीं है।” सरकार द्वारा उन्हें दिए गए नोटिस को भी उन्होंने पूरी तरह सही ठहराया।

दिग्विजय सिंह को ‘शास्त्र ज्ञान’ की चुनौती

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा ‘हिन्दू’ शब्द को लेकर दिए गए बयानों पर तंज कसते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि उन्हें शास्त्र के बारे में कुछ भी नहीं पता है। उन्होंने शास्त्रोक्त श्लोकों का उदाहरण देते हुए ‘हिन्दू’ शब्द की व्याख्या की और कहा, “दिग्विजय सिंह को शास्त्रों का ‘श’ भी नहीं आता, तो मैं उनके बारे में क्या कहूं।”

धीरेंद्र शास्त्री के ‘4 बच्चे’ वाले बयान का समर्थन

जगद्गुरु ने अपने शिष्य और बागेश्वर धाम के सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने हिंदुओं को 4 बच्चे पैदा करने की सलाह दी थी। रामभद्राचार्य ने संक्षिप्त और स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बयान ठीक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

धार्मिक जगत में हलचल

जगद्गुरु रामभद्राचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सनातन धर्म की विभिन्न परंपराओं और पदों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। अपनी विद्वत्ता के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले रामभद्राचार्य के इन बयानों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वे मर्यादा और शास्त्र सम्मत परंपराओं से किसी भी प्रकार के समझौते के पक्ष में नहीं हैं।

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