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Mathura News: ‘UGC नियमों’ पर घिरे राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह; जनता के कड़े सवालों से हुए असहज

by Tarun Bhardwaj • January 27, 2026
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यूनिक समय, मथुरा। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह के मथुरा प्रवास के दौरान आयोजित एक जन चौपाल में उस समय स्थिति असहज हो गई, जब स्थानीय जनता और युवाओं ने सरकार की नीतियों पर सवालों की बौछार कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और ‘जी राम जी’ के संदेश को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में शिक्षा नीतियों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बनाम जमीनी सवाल

कार्यक्रम की शुरुआत अरुण सिंह द्वारा राम मंदिर निर्माण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उपलब्धियों को गिनाने के साथ हुई। पार्टी का लक्ष्य ग्रामीणों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना था। हालांकि, जैसे ही संवाद का दौर शुरू हुआ, शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों ने मंच की रौनक को फीका कर दिया। स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की हालिया शिक्षा नीतियों पर प्रहार किया।

UGC नियमों पर घिरे महामंत्री

चौपाल में उपस्थित युवाओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि UGC के नए नियम छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। जनता ने इन कानूनों को ‘छात्र विरोधी’ करार देते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने या संशोधित करने की मांग की। सीधे और तीखे सवालों का सामना करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह रक्षात्मक मुद्रा में नजर आए। जब छात्रों ने ठोस समाधान मांगा, तो अरुण सिंह ने केवल यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “उच्च स्तर पर बातचीत चल रही है” और “सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है।”

बारिश ने बिगाड़ा खेल, शिकायतों पर अड़े रहे ग्रामीण

संवाद के दौरान ही अचानक हुई तेज बारिश ने अव्यवस्थाओं को और बढ़ा दिया। पंडाल में पानी भरने और कीचड़ होने के बावजूद लोग अपनी जगह से नहीं हिले और अपनी शिकायतों को लेकर अड़े रहे। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना था कि वे केवल राम मंदिर और सांस्कृतिक मुद्दों के आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे; उन्हें शिक्षा, रोजगार और छात्र हितों से जुड़ी स्पष्ट सरकारी नीति चाहिए।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा

मथुरा जैसे भाजपा के गढ़ में राष्ट्रीय स्तर के नेता को इस तरह के तीखे विरोध का सामना करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों में अब केवल भावनात्मक मुद्दों के बजाय शिक्षा और कानून जैसे गंभीर विषयों पर भी जागरूकता बढ़ रही है।

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