
यूनिक समय, नई दिल्ली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे और निलंबन के मामले ने अब एक बड़ा धार्मिक और सियासी मोड़ ले लिया है। सरकार द्वारा इस्तीफा नामंजूर कर निलंबित किए जाने के बाद, ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खुद अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बात की है। शंकराचार्य ने न केवल इस साहसी कदम के लिए उनका अभिनंदन किया, बल्कि उन्हें सनातन धर्म के क्षेत्र में सरकार से भी ऊंचा पद और सम्मान देने का भरोसा दिया है।
शंकराचार्य का बड़ा आश्वासन
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अलंकार अग्निहोत्री के बीच हुई इस बातचीत ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। शंकराचार्य ने फोन पर कहा कि “आपके इस कदम का पूरा सनातन समाज अभिनंदन करता है। हम चाहते हैं कि आपके जैसे प्रबुद्ध और संवेदनशील लोग सनातन धर्म की सेवा में आगे आएं। आपने जिस सरकारी पद का त्याग किया है, हम आपको उससे भी ऊंचा और सम्मानित पद देंगे।” शंकराचार्य का यह बयान स्पष्ट करता है कि वे अलंकार के इस निर्णय को धर्म की रक्षा के लिए उठाया गया कदम मान रहे हैं।
विवाद की जड़
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रथ से स्नान के लिए जाने से रोका गया और उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ। अलंकार अग्निहोत्री ने इसी घटना और यूजीसी (UGC) से जुड़े विवादों को आधार बनाकर इस्तीफा दिया था। उनका आरोप था कि सरकार शंकराचार्य के साथ उचित बर्ताव नहीं कर रही है। इस घटना के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वर्तमान में अनशन पर हैं और उन्होंने सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया हुआ है।
सियासी चिंगारी बनी आग
अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है। एक तरफ जहाँ सरकार ने इसे अनुशासनहीनता मानकर निलंबन की कार्रवाई की है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे ‘अधिकारियों का दम घोंटने’ और ‘संतों के अपमान’ से जोड़कर देख रहे हैं। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस कदम ने “शंकराचार्य बनाम सरकार” की लड़ाई को अब जनमानस के बीच पहुंचा दिया है।
समझौते के मूड में नहीं शंकराचार्य
प्रयागराज से मिल रही खबरों के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस मामले में बिल्कुल भी झुकने को तैयार नहीं हैं। अलंकार अग्निहोत्री को अपने साथ जोड़ने का उनका प्रस्ताव यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह विवाद थमने के बजाय और बढ़ेगा। अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच और निलंबन के बीच अलंकार अग्निहोत्री का अगला कदम क्या होता है।
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