
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में खूनी खेल बन चुके चाइनीज मांझे के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश में लगातार हो रही मौतों और गंभीर हादसों पर संज्ञान लेते हुए सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब चाइनीज मांझे से होने वाली मौत को ‘हत्या’ (Murder) माना जाएगा और दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं (पूर्व में आईपीसी 302) के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
समीक्षा बैठक में सीएम की फटकार
हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की जवाबदेही तय की। उन्होंने कड़े लहजे में पूछा कि जब चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है, तो यह बाजार में उपलब्ध कैसे हो रहा है? सीएम ने पुलिस और प्रशासन को पूरे प्रदेश में विशेष छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। केवल फुटकर विक्रेताओं पर ही नहीं, बल्कि इस मांझे के भंडारण (Storage) और सप्लाई चेन से जुड़े बड़े माफियाओं की पहचान कर उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया गया है। प्रवर्तन के साथ-साथ आम जनता को भी इसके खतरों के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया गया है।
हालिया हादसों ने झकझोर दिया प्रदेश
उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के कारण हुए हालिया हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, क्योंकि बीते कुछ ही महीनों में इस जानलेवा धागे ने कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। राजधानी लखनऊ में बुधवार को ही हैदरगंज ओवरब्रिज पर 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब की गर्दन कटने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि जौनपुर में डॉक्टर समीर हाशमी ने भी इसी के कारण अपनी जान गंवाई। मेरठ में 2026 की शुरुआत से अब तक कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं, वहीं शाहजहांपुर के रवि शर्मा और अलीगढ़ के सलमान जैसे युवाओं की मौत ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। इस खूनी मांझे का शिकार केवल आम नागरिक ही नहीं हुए, बल्कि जनवरी 2025 में ड्यूटी पर जा रहे कांस्टेबल शाहरुख हसन की मौत से उत्तर प्रदेश पुलिस बल में भी शोक की लहर दौड़ गई थी।
क्यों इतना घातक है ‘चाइनीज मांझा’?
इसे आमतौर पर प्लास्टिक या सिंथेटिक मांझा कहा जाता है, जो पारंपरिक सूती धागे के विपरीत एक अत्यंत जटिल और जानलेवा मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसकी बनावट में नायलॉन या पॉलिएस्टर के धागों का उपयोग होता है जो आसानी से नहीं टूटते, और इसके ऊपर कांच के बारीक टुकड़ों के साथ-साथ एल्युमिनियम, स्टील या टंगस्टन कार्बाइड जैसे धातुओं के पाउडर की परत चढ़ाई जाती है। इस मांझे की धार इतनी अदृश्य और घातक होती है कि इसके मेटल कण आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन यह किसी सर्जिकल ब्लेड की तरह इंसान की त्वचा और हड्डियों को पल भर में काटने की क्षमता रखता है।
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