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India-US Ties: ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

by Tarun Bhardwaj • April 24, 2026
Significant discussions held on bilateral relations between India and the US

India-US Ties: ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

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यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों ने एक स्वर में माना कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच ‘विश्वास की कमी’ (Trust Deficit) सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हालांकि रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग जारी है, लेकिन आपसी तालमेल में आई इस कमी को दूर करना भविष्य के लिए अनिवार्य बताया गया है।

“पुराना तालमेल अब गायब”

कॉन्फ्रेंस के दौरान पैनल चर्चा में शामिल वरिष्ठ नेता और विचारक राम माधव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक समय था जब भारत और अमेरिका के बीच अधिक स्पष्टता और तालमेल था। उन्होंने जोर देकर कहा दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में भरोसा कम हुआ है, जिसे शीर्ष स्तर पर फिर से बनाने की जरूरत है। यह रिश्ता एक ऐसे मोड़ पर है जहां उम्मीदों का न मिलना, नीतियों में अनिश्चितता और निर्णय लेने की धीमी गति जैसी बाधाएं खड़ी हो गई हैं।

एक-दूसरे को समझने में चूक

स्टिमसन सेंटर की एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड ने एक दिलचस्प कूटनीतिक पहलू की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि दोनों देश एक-दूसरे की सीमाओं (Constraints) को समझने में विफल रहे हैं। अक्सर एक देश दूसरे की विवशता को उसकी ‘पसंद’ मान लेता है, जबकि अपनी कमियों को ‘मजबूरी’ बताता है। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों पक्षों को अपने साझा हितों पर ईमानदारी से संवाद करने की आवश्यकता है।

भावनात्मक स्तर पर तनाव और नाराजगी

अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने चर्चा में कहा कि वर्तमान तनाव केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक स्तर पर भी असर डाल रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय पक्ष में इस समय अमेरिका के प्रति गहरी नाराजगी और निराशा देखी जा रही है, जो रक्षा सहयोग और व्यापारिक समझौतों में रुकावट पैदा कर सकती है।

आगे की राह

तनाव के बावजूद विशेषज्ञों ने भविष्य के लिए सकारात्मक संभावनाओं की ओर भी संकेत दिया है। राम माधव ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारा और I2U2 जैसी बड़ी पहलों को फिर से सक्रिय करने पर जोर दिया। भारत अब टैरिफ और ऊर्जा आयात जैसे मुद्दों पर लचीला रुख अपना रहा है, जिससे एक बड़े व्यापार समझौते की उम्मीद जगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकटों के इस दौर में भारत-अमेरिका साझेदारी को बचाने के लिए निरंतर राजनीतिक ध्यान और नई प्राथमिकताओं के साथ तालमेल जरूरी है।

पिछले दो दशकों में रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देश काफी करीब आए हैं, लेकिन हालिया वैश्विक बदलावों ने रिश्तों की दरारों को उजागर कर दिया है। भविष्य में इस साझेदारी की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली कितनी जल्दी अपने आपसी भरोसे को बहाल कर पाते हैं।

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