यूनिक समय, अयोध्या। राम मंदिर के दानपात्र से धन चोरी होने के बेहद संवेदनशील मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। रिमांड पर लिए गए मुख्य आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ के बाद अयोध्या पुलिस की जांच टीम ने बीती देर रात कई संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक, इस छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी (कैश), सोने के कीमती आभूषण और एक लग्जरी चार पहिया वाहन बरामद किया गया है। इसके साथ ही इस पूरे खेल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कर्मचारियों की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ गई है। आरोपियों की निशानदेही पर बरामदगी अयोध्या पुलिस के विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की छापेमारी में आरोपी अनुकल्प के कब्जे से ₹20,000 नकद, एक सोने की चेन, मोबाइल फोन और वारदात की कमाई से उसके पिता के नाम पर खरीदी गई एक स्विफ्ट डिजायर कार बरामद कर जब्त कर ली गई है। इसी कार्रवाई के दौरान आरोपी लवकुश के पास से ₹38,000 नकद बरामद हुए हैं, और साथ ही उसने चोरी के पैसों से अपनी पत्नी को जो सोने का लॉकेट उपहार में दिया था, पुलिस ने उसे भी ढूंढ निकाला और जब्त कर लिया है। इसके अलावा, पुलिस ने आरोपी करुणेश के पास से भी ₹15,000 की नकदी बरामद की है। इस तलाशी और बरामदगी के अलावा जांच टीम को आरोपियों के बैंक खातों की पड़ताल में भारी हेरफेर और संदिग्ध लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं, जिससे प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी चोरी की गई इस बड़ी रकम को वैध (लीगल) दिखाने के लिए अलग-अलग बैंक खातों के जरिए अपने खातों में ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की कोशिश कर रहे थे। चोरी के खुलासे के बाद बड़ा फैसला इस हाई-प्रोफाइल चंदा चोरी कांड में 8 लोगों की गिरफ्तारी और सनसनीखेज खुलासे के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक, अब मंदिर में कोई भी नया आउटसोर्स कैशियर नियुक्त नहीं किया गया है। दरअसल, महाकुंभ और त्योहारों के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए ट्रस्ट ने एक आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए हाउसकीपिंग स्टाफ और सहयोगी कर्मियों की भर्ती की थी। बैंक और ट्रस्ट के सूत्रों ने साफ किया है कि इन आउटसोर्स लड़कों का मुख्य काम कैश गिनना (पैसे की गिनती करना) बिल्कुल नहीं था, इसलिए इनके लिए किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं थी। इनका काम केवल दानपात्र से निकले मुड़े-तुड़े नोटों को सीधा करना, उनकी गड्डियों को व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग लगाना था। नोटों की वास्तविक गिनती का काम तो पूरी तरह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के स्टाफ और उनकी हाईटेक मिक्स-नोट काउंटिंग मशीनों द्वारा किया जाता था, जो पल भर में असली-नकली और ₹100, ₹200 या ₹500 के नोटों को अलग कर देती हैं। जांच की रडार पर SBI के पूर्व और वर्तमान कर्मचारी जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, बैंक प्रबंधन और वहां मौजूद स्टाफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दानपात्र की गणना को मेंटेन करने वाला प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव भी बैंक का वर्तमान कर्मचारी नहीं, बल्कि एक पूर्व बैंकर है। इसके अलावा, एसबीआई के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र (जो वर्तमान में लखनऊ ब्रांच में तैनात हैं) अब सीधे तौर पर अयोध्या पुलिस की रडार पर आ गए हैं। पुलिस जल्द ही गोविंद मिश्र और गणना कक्ष (कैश काउंटिंग रूम) में ड्यूटी पर तैनात रहने वाले अन्य बैंक कर्मचारियों को समन भेजकर पूछताछ करने वाली है। इसके साथ ही, बैंक के साथ एमओयू (MOU) साइन करने वाले अनिल मिश्रा के बयान भी इसी हफ्ते दर्ज किए जाने की संभावना है। आपको बता दें कि इन कर्मचारियों का ड्रेस कोड, इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रिया एक अलग थर्ड-पार्टी एजेंसी संभालती है, जिसमें बैंक सीधा शामिल नहीं होता। बड़ा सवाल पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि यदि गिरफ्तार किए गए आउटसोर्स आरोपी सिर्फ नोट सीधे करने का काम करते थे और मुख्य गिनती बैंक अधिकारियों की देखरेख में होती थी, तो चोरी के वक्त बैंक का स्टाफ क्या कर रहा था? गणना कक्ष जैसे अति-सुरक्षित और सीसीटीवी कैमरों से लैस कमरे में मौजूद होने के बावजूद एसबीआई के लोगों को यह भनक क्यों नहीं लगी कि दानपात्र का चढ़ावा और नोटों की गड्डियां गायब हो रही हैं? क्या इसमें बैंक के किसी अंदरूनी स्टाफ की भी मिलीभगत थी? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा मामला गहरी तफ्तीश का हिस्सा है, और एसबीआई कर्मचारियों के आधिकारिक बयानों के बाद इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो जाएगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Breaking: ‘फौजी’ के सेट पर बड़ा हादसा; जहरीले कीड़े के काटने से अभिनेता राजेश शर्मा की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]