यूनिक समय, नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने आज एक बेहद ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत की है। देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन-पावर्ड (Hydrogen-Powered) ट्रेन आखिरकार पटरी पर दौड़ पड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस अनूठी और आधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह क्रांतिकारी ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच चलेगी, जो पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ ईंधन तकनीक पर आधारित है। कैसे काम करती है हाइड्रोजन तकनीक? आम तौर पर जो बिजली की ट्रेनें पटरियों पर दौड़ती हैं, वे ऊपर लगी ओवरहेड तारों (ओएचई) से बिजली खींचती हैं, लेकिन देश की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन ऊपर लगी बिजली की लाइनों से पावर नहीं लेती है क्योंकि इसके भीतर ही विशेष रूप से डिजाइन किए गए फ्यूल सेल लगाए गए हैं, जहां हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया के जरिए तुरंत बिजली बनाई जाती है। इस पूरी रासायनिक प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी गैस या कार्बन नहीं निकलता है और इंजन से केवल पानी की भाप तथा सामान्य गर्मी ही बाहर निकलती है, जिसके कारण इसे रेल यातायात का अब तक का सबसे स्वच्छ और ग्रीन तरीका बताया जा रहा है। इसके साथ ही, इस हाइड्रोजन तकनीक में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत ट्रेन के भीतर हाइड्रोजन लीक, अत्यधिक गर्मी, आग और धुएं का तत्काल पता लगाने के लिए अत्याधुनिक और बेहद संवेदनशील सुरक्षा प्रणालियां (सेफ्टी अलार्म सिस्टम) पूरी तरह फिट की गई हैं। दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेन दुनियाभर में हाइड्रोजन ट्रेनों का चलन अभी बेहद शुरुआती चरण में है। जर्मनी इस तकनीक को अपनाने वाला विश्व का पहला देश था, जिसके बाद फ्रांस, इटली, चीन और जापान जैसे तकनीकी रूप से विकसित देश भी इस पर तेजी से काम कर रहे हैं। हालांकि, विदेशों में चल रही ऐसी हाइड्रोजन ट्रेनों में आमतौर पर सिर्फ दो से चार डिब्बे ही होते हैं। इसके विपरीत, भारत की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन कुल 10 डिब्बों की बनाई गई है, जिसमें एक बार में लगभग 2600 यात्री बेहद आराम से सफर कर सकेंगे। क्षमता के मामले में यह आकार इसे वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेन बनाता है। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे रूट पर अपनी सेवाएं देगी, जिसे अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के लिए तैयार किया गया है, लेकिन फिलहाल इसे 75 किलोमीटर प्रति घंटे की सुरक्षित स्पीड से ही ट्रैक पर चलाया जाएगा। इसके साथ ही, ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए हरियाणा के जींद में देश का सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग प्लांट स्थापित किया गया है, जहां ट्रेन में बेहद सुरक्षित तरीके से हाइड्रोजन गैस भरने की अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है। हेरिटेज रूटों पर भी चलेगी ट्रेन भारतीय रेलवे इस अभूतपूर्व सफलता के बाद भविष्य में अपनी खूबसूरत हेरिटेज लाइनों, जैसे कालका-शिमला रूट पर भी इन शानदार पर्यावरण-अनुकूल हाइड्रोजन ट्रेनों को चलाने पर सक्रियता से विचार कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क का रिकॉर्ड गति से विद्युतीकरण (इलेक्ट्रिफिकेशन) किया है, जिसके परिणामस्वरूप डीजल इंजन पर निर्भरता लगभग समाप्त होने की कगार पर है। वर्तमान में भारतीय रेलवे के 99 प्रतिशत से भी अधिक ब्रॉड गेज रूट पूरी तरह बिजली से संचालित हो रहे हैं और अब हाइड्रोजन तकनीक का आगमन भारतीय रेल को पूरी तरह से 'नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जक' बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Breaking: अनशन के 20वें दिन सोनम वांगचुक का बड़ा बयान: “20 जुलाई तक हर हाल में जिंदा रहूँगा, नहीं तो भूत बनकर आऊँगा” ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]