यूनिक समय, नई दिल्ली। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर भारत का रुख बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में सामने रखा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है और इसे नीति के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए। आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को खत्म करने का आह्वान प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को केवल आतंकियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे काम करने वाले पूरे तंत्र पर प्रहार करना आवश्यक है। अपने संबोधन में उन्होंने मुख्य बिंदु रखते हुए कहा कि आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को पूरी तरह नष्ट करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक समुदाय को एक सुर में बोलना होगा और इसमें किसी दोहरे मापदंड की जगह नहीं होनी चाहिए, क्योंकि आतंकवाद किसी भी देश के लिए ‘रणनीतिक संपत्ति’ (Strategic Asset) नहीं हो सकता। इसके साथ ही, उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध को युवाओं तथा क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए SCO के सुरक्षा तंत्रों को और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही। शांति, सुरक्षा और कूटनीति पर भारत का जोर प्रधानमंत्री ने SCO के लिए भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभ बताए: शांति और सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर। पश्चिम एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में जारी तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन को प्रभावित करता है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा 'ग्लोबल साउथ' के देशों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी युद्ध या तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। आम नागरिकों और युवाओं तक पहुंचे SCO का लाभ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) महान सभ्यताओं और विचारों का संगम है, इसलिए इसका लाभ सीधे आम नागरिकों और युवाओं तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संगठन की सफलता का असली पैमाना यह होना चाहिए कि इससे युवाओं के लिए कितने नए अवसर पैदा हुए, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले और किसानों को आधुनिक तकनीक का कितना लाभ मिला। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि संगठन के अगले 25 वर्षों के सफर में लोगों के बीच आपसी संबंधों को ही सभी सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए। वैश्विक पटल पर SCO का महत्व किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में SCO के 10 सदस्य देशों के साथ-साथ 'SCO Plus' फॉर्मेट के तहत 15 पार्टनर और 2 ऑब्जर्वर देशों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। उल्लेखनीय है कि SCO के 10 सदस्य देश मिलकर वैश्विक GDP का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। वर्ष 2017 से पूर्ण सदस्य के रूप में जुड़ा भारत लगातार इस मंच का उपयोग क्षेत्रीय शांति, आर्थिक समृद्धि और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Breaking: पीएम मोदी ने 7.8% GDP ग्रोथ के बीच देशवासियों से की भारत में शादी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]