यूनिक समय, नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव समेत 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के 11 प्रमुख नेताओं ने इस मामले को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में 11 प्रमुख विपक्षी नेता शामिल सुप्रीम कोर्ट में दायर इस रिट याचिका में देश के प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के नाम शामिल हैं जिनमें कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल से तेजस्वी प्रसाद यादव, तृणमूल कांग्रेस से सौगत राय, शिवसेना (यूबीटी) से संजय राउत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) से सुप्रिया सुले के अलावा माकपा के एम. ए. बेबी, भाकपा के डी. राजा, झामुमो की महुआ माजी और आईयूएमएल के ई. टी. मोहम्मद बशीर जैसे अन्य नेता भी शामिल हैं। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को बनाया प्रतिवादी याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर कथित तौर पर नाम हटाए जाने और 'वोट चोरी' के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है, और विपक्षी नेताओं ने प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की है। बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक ऐतिहासिक मार्च याचिका दाखिल करने से पहले विपक्षी नेताओं ने दिल्ली के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक करीब एक किलोमीटर लंबा मार्च निकाला। इतिहास में यह पहला अवसर है जब विपक्षी नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस प्रकार का मार्च किया है। मार्च से पूर्व एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने इस आयोजन की तुलना 'शिवजी की बारात' से की, जिसमें सभी का स्वागत किया गया। CJI सूर्यकांत ने मुलाकात से किया था इनकार इससे पहले रविवार को विपक्षी सांसदों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा था ताकि वे मतदाता सूची से जुड़ा ज्ञापन सौंप सकें। हालांकि, सीजेआई ने मुलाकात से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित विषय पहले से ही न्यायपालिका के समक्ष विचाराधीन हैं। उन्होंने नेताओं को प्रशासनिक ज्ञापन के बजाय उचित न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने का परामर्श दिया, जिसके बाद विपक्ष ने यह कदम उठाया। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura: थाना रिफाइनरी क्षेत्र की बाद चौकी के पास चोरों ने बंद मकान को बनाया निशाना; लाखों रुपये के माल पर हाथ साफ ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]