यूनिक समय, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संघ मुख्यालय पर आयोजित वार्षिक विजयादशमी उत्सव (शताब्दी वर्ष) के दौरान अपने संबोधन में देश और दुनिया के कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी उपस्थित रहे। संघ प्रमुख ने अपने भाषण में 'स्व' की भावना, भारत को मजबूत बनाने, रिजीम चेंज की साजिशों और आधुनिक समाज के सामने आ रही चुनौतियों का विस्तार से जिक्र किया। 'स्व' की भावना हमारी एकता का मुख्य आधार संघ प्रमुख ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है और हमारी पारंपरिक पहचान इन सभी विविधताओं को स्वीकार करने व उनकी रक्षा करने की रही है। उन्होंने कहा कि हमारी 'हम' की भावना और 'स्व' ही हमारा भावनात्मक बंधन है। इसी के चलते इतनी सारी विविधताओं से भरा देश प्राचीन काल से एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ता आया है। जब हम अपनी इस मूल भावना को भूल गए, तब हमारा पतन हुआ, हम विभाजित हुए और सैकड़ों वर्षों की गुलामी झेली। अब स्वतंत्रता के बाद हमें अपनी पहचान और अस्मिता को याद करते हुए आपसी एकता को और मजबूत करना होगा। रिजीम चेंज से नहीं बदलती परिस्थितियां अपने संबोधन में रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि केवल सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी, ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ और आज भी ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद अपने स्वार्थों का पोषण करने वाली ताकतें और उनके पिट्ठू अलग-अलग जगहों पर प्रभावी बने रहते हैं। दुनिया की कुछ ताकतें अपने स्वार्थ के लिए काम कर रही हैं और भारत का मजबूत होना उनके लिए चुनौती बन सकता है, इसीलिए भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नेपाल, बांग्लादेश, फ्रांस और अल्बानिया जैसी जगहों पर हो रही अशांति का जिक्र करते हुए उन्होंने चेताया कि भारत इन ताकतों का मुख्य निशाना बना हुआ है। आधुनिक चुनौतियां और ओटीटी कंटेंट पर चिंता संघ प्रमुख ने समाज के सामने आ रही नई और गंभीर समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए ड्रग्स और ओटीटी के संदर्भ में कहा कि आज के युवा बिना सोचे-समझे ओटीटी (OTT) कंटेंट देख रहे हैं, जिस पर नियंत्रण की आवश्यकता है और समझ की कमी के कारण आज युवा नशीले पदार्थों यानी ड्रग्स की लत का शिकार हो रहे हैं जो एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। पर्यावरण और हिमालयी संकट के मामले में नेपाल तथा हिमालयी क्षेत्र में हाल ही में हुई त्रासदियों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे एकतरफा विकास का परिणाम बताया। आंदोलनों की मर्यादा पर जोर देते हुए यह कहा कि लोकतंत्र में आंदोलनों की जगह है लेकिन उनका उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए तथा विरोध प्रदर्शनों, नेताओं या प्रशासन की ऐसी कोई हरकत नहीं होनी चाहिए जिससे समाज में नफरत या बंटवारा पैदा हो क्योंकि भावनाएं चाहे कितनी भी तीव्र हों, सभी को संविधान और कानून की मर्यादा का पालन करना चाहिए। दुनिया को भारत से उम्मीदें मोहन भागवत ने कहा कि आज दुनिया में देश का मान बढ़ा है और भारत के प्रति वैश्विक जिज्ञासा भी तेजी से बढ़ रही है। दुनिया के विकसित देशों में भौतिक संपन्नता होने के बावजूद मानसिक तनाव, पारिवारिक जीवन का क्षरण और पर्यावरणीय संकट जैसी समस्याएं हैं, जिनका उत्तर उनके पास नहीं है। आज दुनिया यह मानती है कि इन सभी वैश्विक समस्याओं का समाधान केवल भारत की प्राचीन परंपरा और दर्शन के पास ही है। कार्यक्रम की शुरुआत में संघ प्रमुख ने 'शस्त्र पूजा' की और शक्ति की उपासना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्र के नवउत्थान और सद्गुणों को जागृत करने में संगठित शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura: आज होगा रावण-अहिरावण के पुतलों का दहन; सीओ सिटी और नगर मजिस्ट्रेट ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]