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Mathura News: वृंदावन पहुंचे भगवान जगन्नाथ; बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ विरजा मंडप में 7 दिन करेंगे प्रवास

by Tarun Bhardwaj • October 21, 2026
Lord Jagannath arrives in Vrindavan

Mathura News: वृंदावन पहुंचे भगवान जगन्नाथ; बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ विरजा मंडप में 7 दिन करेंगे प्रवास

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यूनिक समय, वृन्दावन। भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीला भूमि ब्रज और भगवान जगन्नाथ की पवित्र नगरी पुरी की धार्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम इन दिनों मथुरा के वृंदावन में देखने को मिल रहा है। वृंदावन के कुंभ क्षेत्र स्थित विरजा मंडप में भगवान जगन्नाथ की भक्ति का अनूठा उत्सव चल रहा है, जहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।

सात दिन का हुआ भगवान का प्रवास

विश्व भ्रमण पर निकले भगवान जगन्नाथ नेपाल और श्रीलंका की यात्रा के बाद अब ब्रज पहुंचे हैं। यहां भक्तों की अगाध आस्था और मांग को देखते हुए उनका प्रवास पांच दिन से बढ़ाकर सात दिन कर दिया गया है। यमुना किनारे स्थित हरियाली से घिरे कुंभ क्षेत्र में भजन-कीर्तन, कथा और दिव्य झांकियों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में सराबोर है। इस धार्मिक यात्रा में भव्य डोले के साथ करीब 500 भक्तों का दल शामिल है, जिसका मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति, सद्भाव और मैत्री का संदेश देना है।

स्कंद पुराण की कथा और संतों का सान्निध्य

संत सत्यानंद महाराज के अनुसार, विरजा मंडप में स्कंद पुराण में वर्णित भगवान जगन्नाथ की महिमा का गुणगान किया जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान में संत सत्यानंद महाराज, दीनबंधु महाराज, परमानंद महाराज और बाबा दयानिधि दास श्रद्धालुओं को महाप्रभु की लीलाओं से परिचित करा रहे हैं। यहां प्रतिदिन सुबह 6 से 8:30 बजे तक और शाम 6 से रात 9 बजे तक कथा, दर्शन और भक्ति का भव्य क्रम चल रहा है, जिसमें दिल्ली और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त पहुंच रहे हैं।

24 दिव्य झांकियों में भगवान के मनमोहक स्वरूप

दीनबंधु दास महाराज ने बताया कि पुरी की परंपरा के अनुरूप भगवान जगन्नाथ यहां विभिन्न दिव्य वेशों में दर्शन दे रहे हैं। इनमें स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित राजराजेश्वर वेश, गजानन, राधा-दामोदर, त्रिविक्रम, लक्ष्मी-नारायण, नृसिंह, वनभोजी, कालियादलन, कृष्ण-बलराम, रघुनाथ और पद्म वेश शामिल हैं। ओडिशा की पारंपरिक सेवा-पद्धति और पूजन विधान के अनुसार हो रही यह पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

ब्रज और पुरी की संस्कृति का अनूठा मिलन

एक तरफ जहाँ पुरी की रथयात्रा और विविध वेशों की प्राचीन परंपरा है, वहीं दूसरी तरफ वृंदावन की भजन-संकीर्तन और श्रीराधा-कृष्ण की लीलाओं की संस्कृति है। इन दोनों महान परंपराओं का यह मिलन श्रद्धालुओं को एक साथ अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान कर रहा है।

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