Article 370: पाकिस्‍तान ने राहुल के यूटर्न पर दी प्रतिक्रिया, फवाद चौधरी ने दी यह नसीहत

राहुल गांधी ने कहा है कि कश्‍मीर भारत का आंतरिक मामला है। राहुल के बयान पर पाकिस्‍तान ने उन्‍हें नसीहद देते हुए कहा है कि कांग्रेस नेता को अपने रुख पर कायम रहना चाह‍िए।

नई दिल्‍ली। Kashmir Issue पर केंद्र की मोदी सरकार को घेरते रहने वाले राहुल गांधी ने अब यूटर्न लेते हुए सरकार का समर्थन किया है। उन्‍होंने कहा है कि कश्‍मीर भारत का आंतरिक मामला है। इस मामले में पाकिस्‍तान या किसी दूसरे देश को दखल देने की कोई जगह नहीं है। कश्‍मीर में हिंसा पाकिस्तान द्वारा उकसाए जाने की वजह से हो रही है। पाकिस्‍तान दुनिया भर में आतंकवाद का प्रमुख समर्थक है।

राहुल गांधी ने बुधवार को एक के बाद एक दो ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्‍होंने लिखा, ‘मैं कई मसलों पर सरकार से असहमत हूं, लेकिन यह स्‍पष्‍ट कर देना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है। इसमें पाकिस्तान या फिर किसी दूसरे देश को हस्तक्षेप करने की कोई जगह नहीं है।’ इसके कुछ ही देर बाद राहुल गांधी ने दूसरा ट्वीट करके पाकिस्‍तान पर करारा हमला बोला। राहुल ने लिखा, ‘जम्मू-कश्मीर में हिंसा हो रही है। यह हिंसा इसलिए हो रही है क्योंकि पाकिस्तान इसे भड़का रहा है और इसका समर्थन कर रहा है। पाकिस्‍तान ऐसा मुल्‍क जिसकी पहचान दुनियाभर में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश की रही है।’

राहुल गांधी के इस बयान पर कि कश्‍मीर भारत का अंदरूनी मसला है, पाकिस्‍तान ने कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष को नसीहत दी है। पाकिस्‍तान के प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद हुसैन चौधरी ने राहुल गांधी के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा कि राहुल गांधी मोतीलाल नेहरू की तरह मजबूती से खड़े रहें। हालांकि, राहुल के बदले रुख पर पाकिस्‍तानी मंत्री ने कटाक्ष भी किया है। फवाद चौधरी ने आगे लिखा है कि आपकी (राहुल गांधी) राजनीति की समस्‍या कन्‍फ्यूजन है।

दरअसल, राहुल गांधी का यह चौंकाने वाला बयान तब सामने आया है जब पाकिस्‍तान सरकार ने कश्‍मीर मसले पर संयुक्‍त राष्‍ट्र को दी गई एक शिकायत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान का कथित तौर पर इस्‍तेमाल किया है। इन मीडिया रिपोर्टों के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी पूरी तरह बैकफुट पर है। कांग्रेस प्रवक्‍ता सुरजेवाला ने सफाई देते हुए बयान जारी किया है।

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सुरजेवाला ने बुधवार को कहा कि हमने ऐसी खबरें देखी हैं, जिनमें पाकिस्तानी सरकार द्वारा जम्मू एवं कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में दी गई कथित याचिका के हवाले से राहुल गांधी का नाम शरारतपूर्ण तरीके से घसीटा गया है। ऐसा इसलिए ताकि पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठों को सच साबित किया जा सके। दुनिया में किसी को भी इसमें संदेह नहीं होना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्‍न अंग थे, हैं, और हमेशा रहेंगे… पाकिस्तान की कपटपूर्ण तरकीबों से इस हकीकत को बदला नहीं जा सकेगा।

राहुल गांधी का ट्वीट सामने आने के बाद सियासत भी गरमा गई है। भाजपा सांसद गिर‍िराज सिंह ने राहुल गांधी के ट्वीट पर रिट्वीट करते हुए कहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने भारत को बहुत जख्‍म दिए हैं। हर जगह मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान का आखरी सहारा राहुल गांधी और कांग्रेस ही बची है। इसके साथ ही गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी का वह वीडियो भी शेयर किया है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि पाकिस्‍तान ने यूएन में डाली गई याचिका में इसी वीडियो का हवाला दिया है। भाजपा सांसद ने कहा है कि कांग्रेस का हाथ पाकिस्‍तान के साथ… राहुल गांधी को हिंदुस्तान और जम्मू कश्मीर की चिंता नहीं है, सिर्फ वोट बैंक की चिंता है।

कांग्रेस का हाथ पाकिस्तान के साथ!

राहुल गांधी के इसी बयान को हथियार बनाकर पाकिस्तान ने यूएन में पेटीशन डाला था।
राहुल गांधी को हिंदुस्तान और जम्मू कश्मीर की चिंता नहीं है,सिर्फ वोट बैंक की चिंता है।

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इससे पहले 24 अगस्‍त को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर पहुंचा था। हालांकि, एयरपोर्ट पर भारी हंगामे के बाद सभी को वापस दिल्ली भेज दिया गया। तब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर कश्मीर में लोकतंत्र की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ नेताओं को नजरबंद करने की निंदा की थी। उन्‍होंने कहा था कि वह कश्मीर के हालात का खुद जायजा लेंगे।

यही नहीं बीते रविवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने श्रीनगर एयरपोर्ट पर रोके जाने का एक वीडियो भी ट्वीट किया था। इसमें वह यह कहते हुए दिखाई दिये कि मुझे राज्यपाल ने आमंत्रित किया था… अब मैं आया हूं तो बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई और मुझे रोका जा रहा है। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि उस वक्‍त मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी की गई थी।

इस बीच भारत में रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव ने कहा है कि Article-370 को हटाना भारत सरकार का संप्रभु निर्णय है। यह भारत का आंतरिक मामला है। भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूद सभी मुद्दों को शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के आधार पर बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

 

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