Govardhan: सियाराम बाबा के वार्षिक भंडारे में पहुंचे गुरु शरणानंद महाराज; संतों के मिलन से भक्तिमय हुआ हनुमान बाग

Guru Sharananand Maharaj attended the annual Bhandara of Siyaram Baba

यूनिक समय, मथुरा। ब्रज की पावन धरा गोवर्धन के हनुमान बाग में आयोजित सियाराम बाबा का वार्षिक भंडारा शनिवार को एक विशेष आध्यात्मिक उत्सव में बदल गया। इस अवसर पर जब महामंडलेश्वर गुरु शरणानंद महाराज का आगमन हुआ, तो पूरा क्षेत्र ‘जय सियाराम’ और ‘हनुमान जी की जय’ के जयकारों से गूँज उठा। दो महान संतों के इस मिलन ने श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक वातावरण निर्मित कर दिया।

संत मिलन का मनोहारी दृश्य

जैसे ही गुरु शरणानंद महाराज हनुमान बाग पहुंचे, सियाराम बाबा ने स्वयं आगे बढ़कर उनका भव्य और विधिवत स्वागत किया। संतों के इस पारंपरिक मिलन को देख उपस्थित हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। गुरु शरणानंद महाराज ने सबसे पहले हनुमान जी के दर्शन कर पूजन किया और फिर भंडारा स्थल का सूक्ष्म अवलोकन किया। उन्होंने आयोजन की व्यापकता और व्यवस्थाओं की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए सियाराम बाबा को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

लाखों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

सियाराम बाबा के सानिध्य में आयोजित इस विशाल वार्षिक भंडारे में दूर-दराज के क्षेत्रों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। भंडारे में भक्तों के लिए बैठने और प्रसाद वितरण की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है। इस दौरान दोनों संतों के बीच संक्षिप्त आध्यात्मिक चर्चा भी हुई, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। संतों ने संदेश दिया कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। गोवर्धन क्षेत्र में चारों ओर भक्ति की अविरल धारा बह रही है और भक्तों के चेहरों पर संतोष की अनुभूति स्पष्ट रूप से झलक रही है।

गुरु शरणानंद महाराज का आशीर्वाद

गुरु शरणानंद महाराज ने स्वयं भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक अनुष्ठान समाज में प्रेम, सेवा भावना और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। उन्होंने कहा कि संतों का एकत्र होना समाज के लिए कल्याणकारी है और यह धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के बाद महाराज अपने काफिले के साथ आश्रम की ओर प्रस्थान कर गए।

यह वार्षिक भंडारा न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण का एक ऐसा जीवंत उदाहरण बन गया, जिसने समूचे ब्रजमंडल में नई ऊर्जा का संचार कर दिया है।

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