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हरियाणा: शादी के कार्ड पर किसान नेता ने छपवाया ऐसा संदेश, अब सोशल मीडिया पर आ रहे मजेदार रिएक्शन

by Raju Chaurasia • November 28, 2021
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झज्जर। दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से किसान आंदोलन जारी है। हरियाणा में भाजपा और जजपा के नेताओं का विरोध भी लगातार बढ़ रहा है। झज्जर के रहने वाले विश्व वीर जाट महासभा के अध्यक्ष और किसान नेता राजेश धनखड़ ने 1 दिसंबर को परिवार में होने वाली बेटी की शादी का एक अनूठा कार्ड छपवाया है। इसमें लिखा है- BJP, JJP और RSS के लोग शादी से दूर रहें। बुधवार को ये कार्ड उस वक्त चर्चा में आया, जब सर छोटू राम जयंती पर रेवाड़ी आए किसान नेता युद्धवीर सिंह ने मंच पर सार्वजनिक तौर पर दिखाया और भाजपा (BJP), जजपा (JJP), आरएसएस (RSS) के विरोध में लोगों से एकजुट रहने का आह्वान किया।

मातनहेल गांव में रहने वाले राजेश धनखड़ विश्व जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और जय जवान जय किसान मजदूर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और ब्लॉक समिति के चेयरमैन भी रहे हैं। राजेश ने घर में होने वाली शादी के कार्ड पर ‘कृपया BJP, JJP और RSS के लोग इस शादी से दूर रहें’ छपवाया है। माना जा रहा है कि इस तरह के संदेश लिखवा कर किसान और जाट नेता सरकार, भाजपा, जजपा और आरएसएस के लोगों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। ये शादी एक नवंबर को झज्जर में होने वाली है।

दरअसल, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य राज्यों के किसान तीन कृषि कानून के बाद से भाजपा नेताओं का विरोध करते आ रहे हैं। हरियाणा में तो भाजपा और जजपा नेताओं का खुलकर विरोध किया जा रहा है। जिसके चलते कई बार बवाल भी हो चुका है। लेकिन, शादी के कार्ड पर नाराजगी जताए जाने का ये पहला मामला है। फिलहाल, शादी का ये कार्ड अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यूजर्स एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिरकार ऐसा क्या हो गया कि आप शादी के कार्ड पर ऐसे संदेश छपवा रहे हैं। कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि शादी में ना बुलाने और खाने में पैसे खर्च ना करने का ये बहुत ही बढ़िया रास्ता है।

हरियाणा के सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर एक साल से किसानों का आंदोलन चल रहा है। 26 नवंबर से किसान यहां दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन करने बैठे थे। एक हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया तो वह राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। दोनों ही बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की अपील की गई है। हालांकि, पीएम के ऐलान के बाद से किसान आंदोलन के मंच से भाजपा और केंद्र सरकार को कोसने के भाषण कम सुनाई दे रहे हैं

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