India: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच DGCA ने जारी की हाई-रिस्क एडवाइजरी; 11 देशों के हवाई क्षेत्र से बचने के निर्देश

Amidst the ongoing conflict in the Middle East, the DGCA has issued a high-risk advisory

यूनिक समय, नई दिल्ली। मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजराइल के बीच भड़की भीषण जंग ने अब वैश्विक हवाई यातायात पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों को देखते हुए भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त एडवाइजरी जारी की है। DGCA ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को क्षेत्र के 11 संवेदनशील हवाई क्षेत्रों (Airspaces) से पूरी तरह बचने या अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह सुरक्षा निर्देश 28 मार्च, 2026 तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

11 देश और ‘हाई रिस्क’ जोन का गणित

DGCA की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के ऊपर हालिया अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों के कारण नागरिक उड़ानों के लिए ‘हाई रिस्क’ का माहौल बन गया है, जिससे तेहरान की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका के चलते कई देशों के हवाई क्षेत्र को खतरनाक श्रेणी में रखा गया है।

इस एडवाइजरी के तहत खाड़ी और पड़ोसी देशों में ईरान, इजराइल, लेबनान, इराक, जॉर्डन और सीरिया के साथ-साथ रणनीतिक हवाई मार्ग वाले सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान के एयरस्पेस को उच्च जोखिम वाला माना गया है। DGCA ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन क्षेत्रों के फ़्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन्स (FIRs) के तहत सभी ऊंचाइयों पर उड़ान भरना जोखिम भरा हो सकता है, और विशेष रूप से सऊदी अरब व ओमान के हवाई क्षेत्र में विमानों को FL320 (32,000 फीट) से नीचे उड़ान न भरने की सख्त सलाह दी गई है।

परिचालन संबंधी चुनौतियां और आकस्मिक योज

DGCA ने स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि खाड़ी क्षेत्र में सक्रिय सैन्य अभियानों के चलते तकनीकी और परिचालन संबंधी त्रुटियां (Operational Errors) होने की भारी आशंका है, जो यात्री विमानों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।

इस जोखिम को कम करने के लिए एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों के हवाई अड्डों के लिए एक मजबूत ‘आकस्मिक योजना’ (Contingency Plan) तैयार रखें और जिन रूटों पर उड़ान की अनुमति है, वहां अपनी निगरानी प्रणालियों (Monitoring Systems) को और भी सख्त करें। इसके साथ ही, विमानन कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे संबंधित देशों द्वारा जारी किए गए ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAMs) और एयरोनॉटिकल सूचनाओं (AIPs) पर पल-पल की नजर रखें ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल निर्णय लिया जा सके।

पुराने प्रतिबंध भी रहेंगे जारी

DGCA ने साफ किया है कि सीरिया और यमन के हवाई क्षेत्र को लेकर जो प्रतिबंध पहले से लागू थे, वे इस नई एडवाइजरी के साथ भी प्रभावी रहेंगे। इस निर्णय का सीधा असर भारत से यूरोप और पश्चिम एशिया जाने वाली उड़ानों के समय और किराए पर पड़ सकता है, क्योंकि विमानों को अब लंबे वैकल्पिक रास्तों (Longer Routes) का उपयोग करना होगा।

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