
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के सिलचर में विकास की नई इबारत लिखते हुए 24,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन किया, जो उत्तर पूर्व का पहला ‘एक्सेस कंट्रोल्ड हाई स्पीड कॉरिडोर’ होगा। पीएम ने अपने संबोधन में बराक घाटी को दक्षिण-पूर्व एशिया के विशाल बाजार से जोड़ने और इसे एक बड़ा ‘लॉजिस्टिक हब’ बनाने का विजन पेश किया।
भाषण के मुख्य अंश और विकास का खाका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास किए गए 166 किलोमीटर लंबे शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर पर लगभग 22,860 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे गुवाहाटी और सिलचर के बीच यात्रा का समय 8.5 घंटे से घटकर मात्र 5 घंटे रह जाएगा। यह आधुनिक कॉरिडोर न केवल असम और मेघालय के बीच कनेक्टिविटी को सुधारेगा, बल्कि मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा को जोड़ते हुए बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के विशाल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भारत की सीधी और सुगम पहुंच सुनिश्चित करेगा।
कांग्रेस की नीतियों पर तीखा प्रहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आजादी के बाद कई दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने उत्तर पूर्व को ‘दिल्ली और दिल’ दोनों से दूर रखकर उपेक्षित रखा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि कांग्रेस द्वारा की गई गलत सीमा निर्धारण नीतियों के कारण ही ऐतिहासिक रूप से व्यापारिक केंद्र रही बराक घाटी का समुद्र से सीधा संपर्क टूट गया था। पीएम मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस ने असम को ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति की प्रयोगशाला बनाकर यहाँ के युवाओं को हिंसा और आतंकवाद के कुचक्र में उलझाए रखा, जबकि वर्तमान ‘डबल इंजन’ सरकार युवाओं के लिए अवसरों का नया आसमान खोलकर इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है।
एक्ट ईस्ट नीति का केंद्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार की दृष्टि में सीमा पर स्थित गांव ‘अंतिम’ नहीं, बल्कि ‘देश के पहले’ गांव हैं, जो सुरक्षा और विकास की दृष्टि से सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हैं। इसी सोच के साथ कछार जिले से ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के अगले चरण की शुरुआत की गई है, जिससे बराक घाटी के सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचा सुदृढ़ होगा और पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को भी नई ऊर्जा मिलेगी। प्रधानमंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया कि रेल, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी ये परियोजनाएं असम सहित पूरे उत्तर-पूर्व के किसानों और युवाओं के लिए समृद्धि के द्वार खोलेंगी, जिससे यह संपूर्ण क्षेत्र निकट भविष्य में भारत का एक प्रमुख ‘ट्रेड हब’ बनकर उभरेगा।
नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Leave a Reply