
यूनिक समय, नई दिल्ली। देश में एलपीजी (LPG) की बढ़ती किल्लत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्ष के बीच भारत के लिए एक बहुत ही सुखद खबर सामने आई है। भारतीय विशालकाय गैस वाहक जहाज “नंदा देवी” 46,500 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर गुजरात के वाडीनार पोर्ट पर पहुँच गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनावपूर्ण माहौल के बीच इस खेप का सुरक्षित भारत पहुँचना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युद्ध क्षेत्र से भारत तक का साहसी सफर
भारतीय गैस वाहक जहाज ‘नंदा देवी’ का यह सफर अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील और वर्तमान में संघर्षग्रस्त समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को पार करना था। इस कठिन मिशन को सफल बनाने के लिए भारतीय पोत परिवहन निगम और जहाजरानी मंत्रालय की विशेष पहल पर भारतीय तथा ईरानी नौसेनाओं ने जहाज को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान किया। नौसेना के इसी कड़े पहरे और सुरक्षा घेरे के बीच यह जहाज सफलतापूर्वक युद्ध क्षेत्र से बाहर निकलने में कामयाब रहा और अब 46,500 मीट्रिक टन LPG की महत्वपूर्ण खेप लेकर गुजरात के तट की ओर बढ़ रहा है।
पूरे देश में कैसे होगा गैस का वितरण?
वर्तमान में वाडीनार पोर्ट के पास समुद्र के बीचों-बीच ‘नंदा देवी’ जहाज से एलपीजी को दूसरे जहाजों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, जिसके तहत कुल स्टॉक का आधा हिस्सा पूर्वी भारत की जरूरतों के लिए पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट और शेष आधा हिस्सा दक्षिण भारत की आपूर्ति हेतु तमिलनाडु के एन्नोर पोर्ट भेजा जाएगा। वितरण की इस कड़ी में ‘शिवालिक’ गैस कैरियर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो मुंद्रा पोर्ट पर 12,000 टन LPG उतारने के बाद शेष स्टॉक को गुजरात के दहेज और मैंगलोर के विभिन्न टर्मिनल्स पर ऑफलोड करने के लिए रवाना होगा।
वरिष्ठ अधिकारियों ने बढ़ाया हौसला
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने स्वयं जहाज का दौरा किया और कप्तान व चालक दल से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। जहाज के मुख्य अधिकारी ने इस सफल ऑपरेशन के लिए भारत सरकार और नौसेना का आभार व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की इतनी बड़ी खेप आने से घरेलू बाजारों में गैस की कीमतों और आपूर्ति में स्थिरता आएगी।
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