India-US trade deal: भारत-अमेरिका के बीच हुआ ‘ऐतिहासिक’ व्यापार समझौता; ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी नई उड़ान

India and the US have reached a 'historic' trade agreement

यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त टैरिफ को तत्काल प्रभाव से हटाने का एलान कर दिया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुए हालिया ऐतिहासिक व्यापार समझौते का परिणाम है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी कार्यकारी आदेश के अनुसार, यह राहत भारतीय समयानुसार आज सुबह 10:30 बजे से प्रभावी हो गई है।

भारत का बड़ा कूटनीतिक वादा

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भारत ने अमेरिका की चिंताओं को समझते हुए रूस से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से तेल आयात रोकने का ठोस वादा किया है। इसके बदले में भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा। सिर्फ तेल ही नहीं, भारत ने अगले 10 वर्षों तक अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की रूपरेखा पर भी सहमति जताई है।

पिछले साल रूसी तेल खरीद के कारण भारत पर कुल 50% टैरिफ का बोझ था। अब ट्रंप ने अतिरिक्त 25% शुल्क खत्म कर दिया है और पारस्परिक शुल्क को भी 25 से घटाकर 18% कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अरबों डॉलर की राहत मिलेगी।

$500 अरब की मेगा डील और ‘मेक इन इंडिया’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस समझौते को “अटूट विश्वास का प्रतीक” बताया। संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा। इस डील में ऊर्जा उत्पाद, कोकिंग कोल, कीमती धातुएं, विमान और उनके कलपुर्जे शामिल हैं। डेटा सेंटर के लिए ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) और अन्य डिजिटल उत्पादों के व्यापार पर भी विशेष जोर दिया गया है।

पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि इस साझेदारी से भारत के स्टार्टअप्स, किसानों, एमएसएमई (MSME) और मछुआरों के लिए वैश्विक बाजार खुलेंगे, जिससे युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे।

भविष्य की भरोसेमंद साझेदारी

यह समझौता केवल सामान की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर एक लचीली सप्लाई चेन (Supply Chain) बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। पीएम मोदी के अनुसार, यह निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को प्रगाढ़ करेगा, जिससे ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लक्ष्य को गति मिलेगी। भारत अब वैश्विक विकास में एक प्रमुख और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है।

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