जेटली अमित शाह के बड़े संकटमोचक थे , Narendra Modi को नहीं हटाने की दी थी सलाह

जेटली मोदी-शाह के सबसे बड़े कानूनी सलाहकार भी थे। आइये जानते हैं जेटली ने कब-कब कानूनी सलाहकार के तौर पर अपनी उल्‍लेखनीय भूमिका निभाई…

नई दिल्ली। भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार 24 अगस्त को अंतिम सांस ली। सरकारें चाहे जिसकी भी हो बीते तीन दशक से ज्‍यादा समय तक अपनी विद्वत्‍ता के चलते जेटली हमेशा सत्ता तंत्र के पसंदीदा लोगों में शामिल रहे। वह पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में भी शुमार थे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जब भी कोई चुनौती आई विनम्र और राजनीतिक तौर पर उत्कृष्ट रणनीतिकार जेटली मुख्‍य संकटमोचक के तौर पर सामने आए। यही नहीं वह मोदी-शाह के सबसे बड़े कानूनी सलाहकार भी थे। आइये जानते हैं जेटली ने कब-कब कानूनी सलाहकार के तौर पर अपनी उल्‍लेखनीय भूमिका निभाई…

गुजरात दंगों के बाद हल की थीं कानूनी मुश्किलें 
साल 2002 के गुजरात दंगों के बाद तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की कानूनी दिक्कतें दूर करने की जिम्मेदारी भी जेटली ने ही संभालीं थी। जेटली प्रधानमंत्री मोदी के साथ उस वक्‍त खड़े थे जब उन पर दंगों को लेकर विपक्ष तीखे हमले बोल रहा था। यही नहीं पार्टी के कुछ नेता भी सवाल उठा रहे थे। जेटली को सर्वसम्मति बनाने में महारत हासिल थी। लोग उन्‍हें मोदी का ‘चाणक्य’ भी मानते थे।

सोहराबुद्धीन शेख मामले में की थी शाह की मदद 
साल 2010 में सोहराबुद्धीन शेख एनकाउंटर मामले में जब अमित शाह को जमानत मिलने के बावजूद कोर्ट ने गुजरात में प्रवेश करने पर जब रोक लगा दी थी तो जेटली संकटमोचक के तौर पर सामने आए। कहा जाता है कि शाह शाह सबसे पहले जेटली के घर गए और उनसे मदद मांगी। शाह को उस वक्त अक्सर जेटली के कैलाश कॉलोनी दफ्तर में देखा जाता था। दोनों नेताओं को हफ्ते में कई बार साथ भोजन करते हुए देखा था। सार्थक कोशिशों का ही नतीजा था कि बाद में यह रोक हटा ली गई थी।

तीन तलाक पर साफ की थी सरकार की स्थिति 
राजनीतिक हल्‍कों में माना जाता है कि जेटली ही वह शख्स थे जिन्होंने तीन तलाक जैसे गंभीर और जटिल समस्‍या पर सरकार की स्थिति को स्‍पष्‍ट रूप से सामने रखा था। भाजपा ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर विचार किया तो इस पर आम सहमति बनाना आसान काम नहीं था। सियासी गलियारों के जानकारों का कहना है कि जेटली ही वो चेहरा थे जिन्होंने जूनियर और सीनियर नेताओं को पीएम मोदी के नाम पर मनाने का काम किया।

मोदी को नहीं हटाने की दी थी सलाह 
वकील पृष्‍ठभूमि के जेटली अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे। माना जाता है कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को हटा कर मोदी को उस पद पर बिठाने के लिए जो फैसला वाजपेयी ने लिया था उसमें जेटली ने अहम भूमिका निभाई थी। साल 2002 के गुजरात दंगों के बाद पार्टी के भीतर ही नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए जाने लगे थे। कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तब मोदी को हटाना चाहते थे। उस वक्‍त जेटली अटल और आडवाणी के काफी करीब थे। उन्‍होंने सलाह दी थी कि गुजरात में मोदी को हटाना उचित कदम नहीं होगा।

मोदी की पीएम उम्‍मीदवारी में निभाया था अहम रोल 
ऐसा कहा जाता है कि 1990 के दशक के अंतिम दौर में जब आरएसएस प्रचारक मोदी को दिल्ली में भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया था तब वह 9 अशोक रोड के जेटली के आधिकारिक आवास में ठहरे थे। तब जेटली अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री थे। मोदी को 2014 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के मामले में जेटली ने राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को साथ लाने का काम किया था। इस गहरी दोस्‍ती का ही नतीजा था कि जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने वित्त मंत्री के सभी महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपे। प्रधानमंत्री मोदी जेटली को ‘अनमोल हीरा’ कहते थे।

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